जर्जर स्कूल में 250 बच्चों का भविष्य दांव पर, एक कमरे में 60 से ज्यादा छात्र, परिसर में हो रही मक्के की खेती

बुरहानपुर/ राजू सिंह राठौड़: सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और बच्चों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक माहौल में पढ़ाने के दावे करती है, लेकिन बुरहानपुर जिले के ग्राम पंचायत सोनूद से सामने आई तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती है। यहां प्राइमरी और माध्यमिक विद्यालय के भवन जर्जर हालत में बताए जा रहे हैं। करीब 250 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का दावा है। हालात ऐसे हैं कि पर्याप्त कमरों के अभाव में एक कक्ष में 60 से ज्यादा बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।

जर्जर भवन के बीच पढ़ने को मजबूर बच्चे

सोनूद के सरकारी स्कूल भवन की हालत खराब होने के कारण विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई की समस्या खड़ी हो गई है। स्कूल में करीब 250 बच्चे अध्ययनरत बताए जा रहे हैं, लेकिन उपलब्ध कक्षों की कमी के चलते सभी बच्चों के लिए पर्याप्त जगह नहीं है।

एक कमरे में 60 से अधिक बच्चों के बैठने की स्थिति में न तो बच्चों को पर्याप्त जगह मिल पा रही है और न ही शिक्षकों के लिए प्रभावी तरीके से पढ़ाना आसान है। इससे बच्चों की पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ने की चिंता जताई जा रही है।

 

सबसे बड़ा सवाल बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी है। जर्जर भवन में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए किसी संभावित हादसे का खतरा बना रह सकता है।

स्कूल परिसर में मक्के की खेती ने बढ़ाए सवाल

स्कूल की बदहाल इमारत के साथ परिसर में मक्के की खेती किए जाने का मामला भी सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल परिसर की जमीन पर एक प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा मक्के की फसल उगाई जा रही है।

जिस जमीन का इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई, खेलकूद और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए होना चाहिए, वहां खेती किए जाने को लेकर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं।

लोगों का कहना है कि यदि स्कूल परिसर की जमीन पर वास्तव में खेती की जा रही है, तो शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन को इसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि स्कूल की जमीन के उपयोग की अनुमति किस आधार पर दी गई है।

नए भवन के लिए कई बार की गई मांग

स्कूल से जुड़े शिक्षक के मुताबिक भवन की समस्या को लेकर कई बार नए भवन के निर्माण की मांग की जा चुकी है। इसके लिए आवेदन भी दिए गए, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

शिक्षकों और ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन की स्थिति और बच्चों की संख्या को देखते हुए नए भवन की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। इसके बावजूद निर्माण को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं होने से परेशानी बनी हुई है।

बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर

पर्याप्त कक्ष नहीं होने के कारण बच्चों को सीमित जगह में बैठाकर पढ़ाने की स्थिति बताई जा रही है। एक ही कमरे में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के बैठने से शिक्षकों के लिए प्रत्येक बच्चे पर पर्याप्त ध्यान देना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए केवल किताबें और शिक्षक उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। सुरक्षित भवन, पर्याप्त कक्ष, पेयजल, स्वच्छ परिसर और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी जरूरी हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग और प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर स्कूल भवन की स्थिति की जांच कराने और आवश्यक होने पर नए भवन का निर्माण कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि स्कूल परिसर में खेती किए जाने की शिकायत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जमीन पर अवैध कब्जा या अनधिकृत उपयोग पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

‘पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया’ के दावों पर सवाल

एक तरफ सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ सोनूद के सरकारी स्कूल की स्थिति व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है।

सवाल यह है कि क्या जर्जर भवन और एक कमरे में 60 से ज्यादा बच्चों के बीच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव है? क्या स्कूल परिसर की जमीन का उपयोग खेती के लिए किया जाना उचित है? और अगर समस्या को लेकर कई बार आवेदन दिए जा चुके हैं तो अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?

करीब 250 बच्चों के भविष्य से जुड़ा यह मामला अब शासन-प्रशासन और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी की ओर ध्यान खींच रहा है। जरूरत है कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच करें और बच्चों की सुरक्षा व शिक्षा के लिए जल्द ठोस कदम उठाएं।

नोट: स्कूल भवन की जर्जर स्थिति, एक कक्ष में 60 से अधिक बच्चों के बैठने और परिसर में मक्के की खेती से जुड़े आरोप स्थानीय ग्रामीणों एवं स्कूल पक्ष से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं। इन दावों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। संबंधित शिक्षा विभाग, पंचायत और प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

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  • Manisha Gupta

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