सागर केंद्रीय जेल में 900 से अधिक बंदियों को बांधा गया परमात्म रक्षासूत्र, सकारात्मक जीवन का दिलाया संकल्प

सागर (मप्र)।मनीष कुमार चौबे| रक्षाबंधन के अवसर पर केंद्रीय जेल सागर में परमात्म रक्षासूत्र कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी बहनों ने जेल में निरुद्ध 900 से अधिक बंदियों को रक्षासूत्र बांधकर उन्हें पवित्रता, आत्मसंयम और सकारात्मक जीवन जीने का संकल्प दिलाया।

कार्यक्रम के दौरान जेल प्रशासन और ब्रह्माकुमारी संस्था के सदस्यों ने बंदियों को जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया।

बीते समय को नहीं बदल सकते, भविष्य जरूर बदल सकते हैं

जेल डीआईजी एमआर पटेल ने कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, मनुष्य के भीतर परिवर्तन की संभावना हमेशा बनी रहती है। उन्होंने कहा कि बीते हुए समय को बदला नहीं जा सकता, लेकिन वर्तमान में श्रेष्ठ संकल्प लेकर भविष्य को जरूर बदला जा सकता है।

उन्होंने राजयोग के माध्यम से मन को शांत और शक्तिशाली बनाने तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की बात कही।

गलत रास्ते से दूर रहने का लें संकल्प

जेल अधीक्षक रमेशचंद्र आर्य ने बंदियों से अपील की कि वे जीवन में गलत रास्ते पर नहीं चलने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि अपने व्यवहार और कर्मों के माध्यम से परिवार तथा समाज के लिए सकारात्मक उदाहरण बनने का प्रयास करना चाहिए।

बुराइयों और नकारात्मक विचारों से रक्षा का पर्व

सागर क्षेत्र की संचालिका बीके छाया बहिन ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते का पर्व नहीं है, बल्कि यह स्वयं को बुराइयों और नकारात्मक विचारों से बचाने का आध्यात्मिक संदेश भी देता है। उन्होंने कहा कि रक्षासूत्र आत्मसंयम, पवित्रता और सकारात्मक सोच का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।

वहीं ब्रह्माकुमारी खुशबू बहिन ने महिला बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि रक्षा की जरूरत केवल महिलाओं को ही नहीं, बल्कि सभी को है। उन्होंने बुराइयों से स्वयं की रक्षा करने और अपने भीतर पवित्रता के बल को बढ़ाने का संदेश दिया।

जेल अधिकारी और ब्रह्माकुमारी बहनें रहीं मौजूद

कार्यक्रम में उप अधीक्षक मनोज मिश्रा, सहायक जेल अधीक्षक गीता राठौड़, सहायक जेल अधीक्षक सौरभ सिंह, जेल शिक्षिका गीता रायकवार मौजूद रहीं। ब्रह्माकुमारी संस्था की ओर से बीके छाया बहिन, बीके पार्वती बहिन, बीके कामिनी बहिन और बीके सुनील भाई ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

परमात्म रक्षासूत्र कार्यक्रम के माध्यम से बंदियों को आत्मचिंतन, आत्मसंयम और सकारात्मक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।

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