
खरगापुर/ धर्मेंद्र सिंह लोधी: नगर के शासकीय सांदीपनि बालक प्राथमिक विद्यालय में जर्जर भवन के बीच मासूम बच्चों की पढ़ाई जारी है। विद्यालय के कई कमरों की छत और दीवारों से सीमेंट-प्लास्टर टूटकर गिर रहा है, जबकि जगह-जगह छत के अंदर लगा सरिया बाहर निकल आया है। बारिश के दौरान विद्यालय की रसोई की छत से भी पानी टपकने की समस्या सामने आ रही है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई है।
जर्जर छत के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे
शासकीय सांदीपनि बालक प्राथमिक विद्यालय में रोजाना छोटे बच्चे पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। लेकिन जिन कमरों में उन्हें शिक्षा दी जा रही है, उनकी हालत देखकर स्कूल भवन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कई स्थानों पर छत का प्लास्टर उखड़ चुका है। दीवारों से भी सीमेंट की परत टूटकर गिर रही है। वहीं छत में लगा सरिया बाहर दिखाई देने लगा है। इससे भवन की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा यह है कि यदि छत या दीवार का कोई कमजोर हिस्सा अचानक टूटकर गिरता है तो इसकी चपेट में विद्यार्थी या स्कूल स्टाफ आ सकते हैं।
बारिश में और बिगड़ जाती है स्थिति
विद्यालय भवन की परेशानी बारिश के दौरान और बढ़ जाती है। स्कूल की रसोई की छत से पानी टपकने की बात सामने आई है। लगातार बारिश के कारण भवन में नमी और सीलन की समस्या भी बढ़ सकती है।
रसोई स्कूल का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां बच्चों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। ऐसे में यहां पानी रिसने की समस्या भी व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे छोटे हैं और उन्हें भवन की तकनीकी स्थिति की जानकारी नहीं होती। ऐसे में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन और संबंधित विभाग की है।
अभिभावकों का कहना है कि किसी हादसे का इंतजार करने के बजाय जर्जर भवन का तत्काल निरीक्षण कराया जाना चाहिए। यदि भवन का कोई हिस्सा बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं है तो उसकी मरम्मत होने तक वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
शिक्षा विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से विद्यालय भवन का मौके पर निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जर्जर हिस्सों की स्थिति का तकनीकी परीक्षण कराया जाए और आवश्यकतानुसार मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए।
लोगों ने यह भी मांग की है कि जब तक भवन पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाए, ताकि शिक्षा भी प्रभावित न हो और विद्यार्थियों की सुरक्षा से भी समझौता न हो।
बड़ा सवाल- हादसे के बाद जागेगा विभाग या पहले होगी कार्रवाई?
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में सांदीपनि बालक प्राथमिक विद्यालय की जर्जर स्थिति को लेकर उठ रही शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लेने की जरूरत है।
छत से गिरता प्लास्टर, बाहर निकला सरिया और रसोई की छत से रिसता पानी स्कूल भवन की मौजूदा स्थिति पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कब तक निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई करता है।
नोट: विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति और पानी रिसने संबंधी जानकारी स्थानीय लोगों एवं उपलब्ध जानकारी के आधार पर है। भवन की वास्तविक तकनीकी स्थिति और मरम्मत की आवश्यकता की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग के निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।
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