शिक्षा विभाग में 600 करोड़ की अनियमितता का आरोप: मुकेश नायक ने सरकार से मांगा हिसाब

सार:

भोपाल/ आदि मिश्रा: मध्यप्रदेश के शिक्षा विभाग में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने आरोप लगाया है कि करीब 600 करोड़ रुपये की राशि निजी खातों में ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आ रही है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले का हिसाब जनता और विधानसभा के सामने रखने की मांग की है।

मुकेश नायक ने सवाल उठाया कि यदि सरकारी राशि निजी खातों में पहुंची है तो आखिर वह पैसा किन खातों में गया, किसके निर्देश पर ट्रांसफर हुआ और इसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी की है। उन्होंने दावा किया कि करीब 220 करोड़ रुपये की रिकवरी की बात सामने आई है, लेकिन बाकी राशि को लेकर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

नायक ने 320 करोड़ और 380 करोड़ रुपये से जुड़े कथित लेन-देन की जानकारी भी सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिस काम के लिए बजट आवंटित किया गया था, वह काम जमीन पर कितना हुआ, इसका भी पूरा हिसाब सामने आना चाहिए। कांग्रेस नेता ने मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग की है।

विस्तार:

600 करोड़ की कथित अनियमितता पर सियासी बवाल

मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने सरकार पर निशाना साधते हुए करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मुद्दा उठाया है। नायक का आरोप है कि करीब 600 करोड़ रुपये की राशि निजी खातों में ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आ रही है।

उन्होंने सरकार से पूछा कि अगर सरकारी खजाने से इतनी बड़ी राशि निकली और निजी खातों में पहुंची, तो इस पूरे लेन-देन की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। उनके मुताबिक जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी पैसा कहां खर्च हुआ और उससे संबंधित काम वास्तव में हुआ या नहीं।

220 करोड़ की रिकवरी के दावे ने बढ़ाए सवाल

मुकेश नायक ने करीब 220 करोड़ रुपये की रिकवरी किए जाने की बात का हवाला देते हुए सरकार से बाकी राशि का हिसाब मांगा है। उनका सवाल है कि अगर 220 करोड़ रुपये वापस लाए गए हैं तो शेष राशि कहां है।

उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि कथित तौर पर निजी खातों में पहुंची रकम में से कितनी राशि वापस लाई गई है और कितनी रकम अभी भी जांच या कार्रवाई के दायरे में है।

यही सवाल अब इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा बन गया है। क्योंकि अगर करोड़ों रुपये के लेन-देन पर सवाल उठ रहे हैं तो उसकी पूरी श्रृंखला सामने आना जरूरी है।

320 और 380 करोड़ के लेन-देन पर भी जवाब मांगा

नायक ने 320 करोड़ और 380 करोड़ रुपये से जुड़े कथित लेन-देन को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने मांग की है कि इन रकमों से जुड़े दस्तावेज और पूरा वित्तीय विवरण सार्वजनिक किया जाए।

उनका सवाल है कि इन रकमों का वास्तविक उपयोग कहां हुआ और किस उद्देश्य के लिए बजट स्वीकृत किया गया था। यदि बजट किसी विशेष काम के लिए जारी किया गया था तो उस काम की प्रगति भी जनता के सामने रखी जानी चाहिए।

यानी मामला सिर्फ यह नहीं है कि पैसा कहां गया, बल्कि सवाल यह भी है कि पैसा जिस काम के लिए दिया गया था, वह काम हुआ भी या नहीं।

निजी खातों में सरकारी राशि पहुंचने का आरोप

मुकेश नायक ने सरकारी धन के निजी खातों में कथित ट्रांसफर को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि सरकारी राशि निजी खातों तक पहुंची है तो इसकी प्रक्रिया, अनुमति और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

सरकारी भुगतान की प्रक्रिया में कई स्तरों पर दस्तावेज और स्वीकृतियां होती हैं। ऐसे में नायक का सवाल है कि कथित तौर पर इतनी बड़ी राशि के लेन-देन के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या प्रक्रिया अपनाई।

उन्होंने संबंधित बैंक खातों, भुगतान आदेशों और अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है।

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जिस काम के लिए बजट मिला, वह जमीन पर कितना हुआ?

कांग्रेस नेता ने एक और अहम सवाल उठाया है। उनका कहना है कि सरकार को सिर्फ यह नहीं बताना चाहिए कि कितना पैसा जारी हुआ और कितना वापस आया, बल्कि यह भी बताना चाहिए कि जिस काम के लिए बजट आवंटित हुआ था, वह काम जमीन पर कितना हुआ।

यदि करोड़ों रुपये किसी योजना, निर्माण या अन्य कार्य के लिए स्वीकृत किए गए थे तो उसकी वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए। कितनी राशि खर्च हुई, कितना काम पूरा हुआ और भुगतान किस आधार पर किया गया—इन सवालों के जवाब भी जरूरी हैं।

अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग

नायक ने मामले में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि किस स्तर पर लापरवाही हुई और किस अधिकारी ने भुगतान या लेन-देन को मंजूरी दी।

उन्होंने कहा कि सिर्फ राशि की रिकवरी से मामला खत्म नहीं होना चाहिए। अगर सरकारी धन के इस्तेमाल में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच की मांग

मामले को गंभीर बताते हुए मुकेश नायक ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष और विस्तृत जांच जरूरी है।

नायक के मुताबिक जांच में यह सामने आना चाहिए कि पैसा कहां से जारी हुआ, किन खातों में पहुंचा, किसके निर्देश पर भुगतान हुआ और राशि का अंतिम इस्तेमाल किस तरह किया गया।

सरकार के सामने अब जवाब देने की चुनौती

कांग्रेस नेता के आरोपों के बाद अब सरकार और शिक्षा विभाग के आधिकारिक पक्ष का इंतजार है। विपक्ष ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले के दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।

अगर सरकार के पास इन लेन-देन को लेकर स्पष्ट रिकॉर्ड और प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज हैं तो वह उन्हें सामने रखकर स्थिति साफ कर सकती है। वहीं यदि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने का सवाल भी उठेगा।

आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि करीब 600 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता, 220 करोड़ रुपये की रिकवरी और 320 व 380 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। ये आरोप मुकेश नायक ने लगाए हैं।

इसलिए फिलहाल मामले को आरोपों और उठाए गए सवालों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। सरकार या संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

फिलहाल कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए सरकार से सीधा सवाल किया है—करोड़ों रुपये का यह कथित लेन-देन आखिर कहां हुआ, पैसा किसके पास पहुंचा और जिस काम के लिए बजट दिया गया था, उसका हिसाब कौन देगा?

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  • Manisha Gupta

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