
टीकमगढ़/धर्मेंद्र सिंह लोधी की रिपोर्ट: जिले में किसानों को जैविक खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के अंतर्गत चयनित किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से एक करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे अंतरित की गई है। फसल सत्यापन के बाद जल्द ही दूसरी किस्त के रूप में एक करोड़ रुपये की राशि और किसानों के खातों में भेजी जाएगी।
जिले के 60 गांवों में किसानों से संपर्क कर उन्हें जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता दी जा रही है। किसानों को खेत से लेकर घर की रसोई तक सुरक्षित एवं जैविक खाद्य व्यवस्था अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जैविक सब्जी, अनाज, दाल, चावल, दूध और तेल के उत्पादन में देशी गाय के गोबर एवं गौमूत्र से तैयार जैविक इनपुट के उपयोग की जानकारी भी दी जा रही है।
रासायनिक खेती के विकल्प के रूप में जैविक पद्धति पर जोर
किसानों का कहना है कि रासायनिक खेती में बढ़ते कीटनाशकों और रासायनिक उत्पादों के इस्तेमाल को लेकर अब गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से किसानों को जैविक खाद, प्राकृतिक कृषि पद्धतियों और जैविक खेती के फायदे बताए जा रहे हैं। अभियान के तहत प्रशिक्षित किसानों की खरीफ फसलों का सत्यापन दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट के प्रभारी श्री भुवनेश्वर राय द्वारा किया गया। सत्यापन के दौरान किसानों ने बताया कि उन्होंने जैविक खाद का उपयोग कर खरीफ फसल तैयार की है और आगामी रबी सीजन में भी जैविक खेती अपनाने के लिए उत्साहित हैं।
मिट्टी की उर्वरता और खेती की स्थिरता पर जोर
कृषि विभाग द्वारा किसानों को बताया जा रहा है कि खेत और घर में जैविक तरीके से खाद्य सामग्री का उत्पादन करने से परिवार को ताजा भोजन उपलब्ध हो सकता है और बाजार पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही जैविक खेती मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता बढ़ाने में भी सहायक हो सकती है। प्रशिक्षण के बाद किसानों को फील्ड स्तर पर लगातार मार्गदर्शन देने के लिए पतंजलि के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर और स्थानीय स्तर पर कार्यरत एलआरपी के माध्यम से सहयोग उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है।
2 हजार किसानों से लगातार संपर्क की तैयारी
पतंजलि ऑर्गेनिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, हरिद्वार के माध्यम से जिले के लगभग 2 हजार किसानों से निरंतर संपर्क बनाए रखने के लिए ब्लॉक स्तर पर कोऑर्डिनेटर सक्रिय रहेंगे। अभियान किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार, कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय के निर्देशन तथा उप संचालक कृषि श्री मनोज कश्यप के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है।
टीकमगढ़, जतारा, बल्देवगढ़ और पलेरा के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों तथा कृषि विस्तार अधिकारियों के सहयोग से किसानों को जैविक खेती की तकनीक, जैविक इनपुट, फसल प्रबंधन और खेत स्तर की समस्याओं के समाधान के संबंध में मार्गदर्शन दिया जा रहा है। दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट के स्टेट कोऑर्डिनेटर श्री भुवनेश्वर राय किसानों की फसलों के सत्यापन और जैविक प्रमाणीकरण में सहयोग कर रहे हैं। परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत जैविक खेती को बढ़ावा देने का अभियान लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।
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