
नई दिल्ली/हैदराबाद: क्या आपकी सहमति और बिना किसी ओटीपी के कोई निजी कंपनी आपके पीएफ EPFO खाते और पैन कार्ड से जुड़ा संवेदनशील डेटा देख सकती है या उसका व्यापारिक इस्तेमाल कर सकती है? देश की सर्वोच्च अदालत ने इस गंभीर खतरे पर कड़ा संज्ञान लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उस विस्तृत आवेदन पर गंभीरता से विचार करने और चार महीने के भीतर सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया है, जिसमें प्राइवेट वेरिफिकेशन कंपनियों द्वारा EPFO/UAN और PAN-लिंक्ड रोजगार व वित्तीय डेटा के अनधिकृत इस्तेमाल और व्यावसायिक शोषण का आरोप लगाया गया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रुचि कोहली ने अदालत में पक्ष रखा था। इस याचिका में मांग की गई थी कि EPFO/UAN से जुड़े रोजगार के आंकड़ों, पैन कार्ड की जानकारियों, आयकर रिटर्न, फॉर्म 26AS और एआईएस से जुड़े वित्तीय डेटा को बिना अनुमति देखने, साझा करने, उजागर करने या दुरुपयोग करने पर तुरंत रोक लगाई जाए। याचिका में चिंता जताई गई थी कि निजी जांच एजेंसियां “EPFO पासबुक API” और “फॉर्म 26AS API” जैसी सेवाओं के माध्यम से, बिना स्पष्ट सहमति या OTP वेरिफिकेशन के इस डेटा तक पहुंच रही हैं और केवल PAN व UAN का इस्तेमाल कर किसी व्यक्ति का पूरा रोजगार इतिहास निकालकर व्यावसायिक फायदा उठा रही हैं। इस जनहित याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 के तहत निजता के अधिकार और व्यक्तिगत डेटा को गैर-कानूनी रूप से उजागर होने से बचाने पर जोर दिया गया है।
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इस मामले में श्रम और रोजगार मंत्रालय, EPFO, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), CERT-In, वित्त मंत्रालय, आयकर विभाग और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) सहित विभिन्न सरकारी निकायों को शिकायतें भेजी गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत कोई अंतरिम रोक न लगाते हुए केंद्र सरकार को इन आवेदनों पर विचार करने और चार महीने के भीतर एक व्यापक निर्णय लेते हुए जरूरी एहतियाती कदम उठाने का निर्देश देकर याचिका का निपटारा कर दिया है।
डेटा के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार कई बड़े कदम उठा सकती है। इसमें डेटा तक पहुंच के लिए अनिवार्य रूप से OTP-आधारित या मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करना, “EPFO पासबुक API” व “फॉर्म 26AS API” का विस्तृत ऑडिट करना और डेटा के अवैध इस्तेमाल पर कड़े दंड का प्रावधान शामिल है। इसके अलावा, सरकारी डेटाबेस में उन्नत एन्क्रिप्शन लागू करना, बिना मजबूत सुरक्षा नियमों के निजी कंपनियों द्वारा सरकारी डेटा तक पहुंचने पर रोक लगाना, नागरिकों के लिए dedicated शिकायत सेल बनाना और CERT-In व MeitY के साथ नियमित साइबर सुरक्षा जांच करना शामिल है।
सर्वोच्च अदालत द्वारा वैधानिक डेटा तक अनधिकृत पहुंच के खतरों को स्वीकारने से केंद्र सरकार पर समयबद्ध कदम उठाने का दबाव बना है, जिससे डेटा प्रबंधन की तकनीकी, कानूनी और प्रक्रियात्मक कमियों की व्यापक समीक्षा को बढ़ावा मिलेगा। चार महीने की सीमा तय होने से प्रशासनिक निकायों में जवाबदेही बढ़ेगी। हालांकि, कोर्ट द्वारा कोई अंतरिम स्टे न दिए जाने के कारण समीक्षा अवधि के दौरान अनधिकृत डेटा एक्सेस की गुंजाइश बनी रह सकती है, और सीधी न्यायिक निगरानी समाप्त होने से क्रियान्वयन पूरी तरह सरकार की इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा। फिर भी, यह निर्देश भविष्य में डेटा निजता से जुड़े मुकदमों, नीति निर्माण और व्यक्तिगत वित्तीय जानकारियों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल कायम करता है।
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