
सार
आकिब खान|हटा। तहसील मुख्यालय से लगे बोरीखुर्द और बोरीकलां गांव के ग्रामीणों ने आवागमन के लिए आम रास्ता निर्माण की मांग को लेकर तहसीलदार हटा को आवेदन सौंपा। ग्रामीणों ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 131 के तहत आवेदन देकर समस्या के निराकरण की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते के अभाव में स्कूली छात्र-छात्राओं के साथ मरीजों और ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने जल्द समाधान नहीं होने पर जन आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
विस्तार
हटा। हटा तहसील मुख्यालय से लगे बोरीखुर्द एवं बोरीकलां गांव के ग्रामीणों ने आवागमन के लिए आम रास्ता निर्माण की मांग को लेकर तहसीलदार हटा को आवेदन सौंपा। ग्रामीणों ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 131 के तहत आवेदन प्रस्तुत करते हुए लंबे समय से चली आ रही समस्या का निराकरण कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि बोरीकलां और बोरीखुर्द में आवागमन के लिए उचित आम रास्ता उपलब्ध नहीं है। रास्ते की समस्या के कारण रोजमर्रा के आवागमन में ग्रामीणों को परेशानी होती है। सबसे अधिक दिक्कत स्कूली छात्र-छात्राओं को होती है, जिन्हें स्कूल आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने अथवा आपात स्थिति उत्पन्न होने पर समस्या और गंभीर हो जाती है। पर्याप्त रास्ता नहीं होने के कारण मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि आम रास्ता बनने से गांव के लोगों को आवागमन में राहत मिल सकेगी।
ग्रामीणों ने हटा-पटेरा मुख्य मार्ग से जमराज घाट तक बोरीखुर्द एवं बोरीकलां के मेड़े से आम रास्ता निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा इस ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आवेदन पर शीघ्र कार्रवाई करते हुए प्रस्तावित मार्ग का निराकरण कराया जाए, ताकि दोनों गांवों के लोगों को सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता केवल आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के लिए भी आवश्यक है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो वे जन आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसी स्थिति में आंदोलन की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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