Gen Z को आलसी समझना गलत: छुट्टी पर भी क्यों नहीं हो पाते डिस्कनेक्ट, सर्वे ने खोला राज

Gen Z को अक्सर आलसी या काम से बचने वाली पीढ़ी के तौर पर देखा जाता है, लेकिन छुट्टियों को लेकर सामने आया एक सर्वे इस धारणा से अलग तस्वीर दिखाता है। रिपोर्ट के मुताबिक युवा छुट्टी पर जाने के बाद भी पूरी तरह काम और डिजिटल दुनिया से अलग नहीं हो पाते। लगातार ऑनलाइन रहने, काम से जुड़े मैसेज और डिजिटल गतिविधियों के कारण उनके लिए असली मायने में डिस्कनेक्ट करना मुश्किल हो रहा है।

छुट्टी पर भी फोन और काम से दूरी नहीं

छुट्टी का मतलब आमतौर पर काम से ब्रेक और सुकून माना जाता है, लेकिन Gen Z के लिए यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। नई पीढ़ी यात्रा के दौरान भी फोन, सोशल मीडिया और काम से जुड़े डिजिटल अपडेट से पूरी तरह दूरी नहीं बना पाती। यही वजह है कि केवल छुट्टी पर जाना हमेशा मानसिक रूप से ब्रेक लेने के बराबर नहीं रह गया है।

एक रिसर्च में युवा यात्रियों के बीच छुट्टी के दौरान आराम करने की बदलती आदतों को देखा गया। इसमें सामने आया कि कम उम्र के कई यात्री पारंपरिक तरीके से सिर्फ आराम करने के बजाय छुट्टियों को गतिविधियों और अनुभवों से भरना पसंद करते हैं।

Gen Z की ट्रैवल पसंद भी बदल रही

2026 में सामने आई दूसरी ट्रैवल रिसर्च भी बताती है कि भारतीय Gen Z के बीच लंबी सालाना छुट्टी के बजाय छोटी और ज्यादा व्यक्तिगत यात्राओं का रुझान बढ़ रहा है। Airbnb की रिसर्च के अनुसार भारत में 10 में करीब 7 Gen Z युवा एक लंबी सालाना छुट्टी की जगह तीन छोटी यात्राओं को प्राथमिकता देते हैं। वहीं, 95 प्रतिशत युवा चाहते हैं कि उनकी यात्रा व्यक्तिगत और अलग अनुभव वाली हो।

इससे यह संकेत मिलता है कि युवाओं के लिए यात्रा केवल आराम करने का माध्यम नहीं रह गई है। वे नई जगहों को देखने, अनुभव हासिल करने और अपनी पसंद के हिसाब से समय बिताने को भी महत्व दे रहे हैं।

डिजिटल दुनिया से पूरी तरह कटना क्यों मुश्किल?

स्मार्टफोन और इंटरनेट ने काम, सोशल मीडिया और निजी जीवन के बीच की सीमा को काफी हद तक धुंधला कर दिया है। पहले ऑफिस से बाहर निकलने के बाद काम खत्म माना जाता था, लेकिन अब ईमेल, मैसेज और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए काम से जुड़े अपडेट कहीं से भी मिल सकते हैं।

ऐसे में कोई व्यक्ति छुट्टी पर हो, तब भी जरूरी संदेश देखने या नोटिफिकेशन चेक करने की आदत बनी रह सकती है। इसका असर छुट्टी के दौरान मिलने वाले मानसिक आराम पर भी पड़ सकता है।

छोटी यात्राओं का बढ़ रहा चलन

Gen Z के यात्रा व्यवहार में एक और बदलाव छोटी और ज्यादा सहज यात्राओं को लेकर दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के अनुसार युवा लंबे समय पहले से यात्रा की योजना बनाने के बजाय कई बार यात्रा के करीब आने पर बुकिंग करना पसंद करते हैं। Airbnb की 2026 की रिपोर्ट में भी छोटी यात्राओं और अलग-अलग तरह के व्यक्तिगत अनुभवों की ओर बढ़ते रुझान का उल्लेख किया गया है।

इसका मतलब यह नहीं कि युवा आराम नहीं करना चाहते। बल्कि उनके लिए आराम का तरीका बदल रहा है। किसी के लिए आराम का मतलब पूरे दिन होटल में रहना हो सकता है, तो किसी के लिए नई जगह घूमना, दोस्तों के साथ समय बिताना या बिना तय कार्यक्रम के घूमना।

‘आलसी Gen Z’ वाली धारणा पर सवाल

Gen Z को लेकर अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि युवा मेहनत से बचते हैं और हर समय आराम करना चाहते हैं। लेकिन छुट्टियों और डिजिटल व्यवहार से जुड़ी रिसर्च एक ज्यादा जटिल तस्वीर सामने रखती है।

युवा छुट्टी पर भी जुड़े रहते हैं, नई जगहों का अनुभव लेना चाहते हैं और कई बार आराम करने के बजाय गतिविधियों से भरा ट्रैवल पसंद करते हैं। इसलिए केवल उनके छुट्टी मनाने के तरीके के आधार पर उन्हें आलसी कहना पूरी पीढ़ी की आदतों को सही तरीके से नहीं दर्शाता।

असल बदलाव यह है कि Gen Z के लिए काम, आराम, सोशल मीडिया और यात्रा के बीच की सीमाएं पहले की तुलना में ज्यादा आपस में जुड़ गई हैं। यही वजह है कि छुट्टी पर होने के बावजूद पूरी तरह डिस्कनेक्ट करना कई युवाओं के लिए आसान नहीं है।

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Manisha Gupta

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