
सतना/ राजकुमार बजाज: सतना में विंध्य चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने ₹2000 से अधिक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR शुल्क का विरोध किया है। चेंबर ने सरकार और NPCI से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। पदाधिकारियों का कहना है कि नए शुल्क से छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की मुहिम प्रभावित हो सकती है।
₹2000 से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क का विरोध
सतना। भारत सरकार और NPCI की ओर से 14-15 सितंबर 2026 को जारी नोटिफिकेशन में ₹2000 से अधिक के P2M यानी Person to Merchant UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाए जाने की बात कही गई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अधिकतम ₹300 तक शुल्क लिया जाना है और यह 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने की जानकारी दी गई है। इसी प्रस्ताव के विरोध में विंध्य चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, सतना ने कड़ा रुख अपनाया है।
चेंबर अध्यक्ष सतीश सुखेजा ने कहा कि UPI पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने से छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि व्यापारी पहले से महंगाई और व्यापार में मंदी जैसी परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में नया शुल्क लगाने के बजाय व्यापारियों को राहत देने की जरूरत है।
‘फ्री और सरल’ UPI पर शुल्क को लेकर सवाल
सतीश सुखेजा के अनुसार, सरकार ने UPI को फ्री और सरल डिजिटल भुगतान माध्यम के रूप में बढ़ावा दिया था और इसकी पहुंच छोटे से छोटे दुकानदार तक बनाई गई। अब मर्चेंट भुगतान पर शुल्क लगाने से छोटे कारोबारियों के सामने नई परेशानी खड़ी हो सकती है।
चेंबर ने इस प्रस्ताव को डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की नीति से जोड़ते हुए इसका विरोध किया है। अध्यक्ष का कहना है कि शुल्क का सीधा असर व्यापारी वर्ग की लागत पर पड़ सकता है।
छोटे दुकानदारों पर अतिरिक्त बोझ की आशंका
चेंबर का कहना है कि सतना जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में बड़ी संख्या में व्यापारी डिजिटल भुगतान के लिए UPI पर निर्भर हैं। व्यापारियों के मुताबिक पहले से GST, ऑनलाइन कमीशन और महंगाई से जुड़ी लागत का दबाव है। ऐसे में UPI भुगतान पर MDR लगने से उनकी लागत और बढ़ सकती है।
चेंबर ने यह भी सवाल उठाया है कि भले ही प्रस्तावित व्यवस्था में ग्राहक से सीधे शुल्क नहीं लेने की बात कही जा रही हो, लेकिन मर्चेंट पर शुल्क लगने की स्थिति में इसका आर्थिक प्रभाव अंततः व्यापारियों पर पड़ सकता है।
कैश लेनदेन बढ़ने की जताई आशंका
विंध्य चेम्बर ने आशंका जताई है कि यदि UPI भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो कुछ व्यापारी कैश लेनदेन की ओर वापस जा सकते हैं। चेंबर के अनुसार, ऐसा होने से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के प्रयासों पर असर पड़ सकता है।
चेंबर ने ₹1 लाख से कम टर्नओवर वाले वेंडरों को प्रस्तावित छूट के प्रावधान को भी व्यावहारिक नहीं बताया। पदाधिकारियों का तर्क है कि किराना, कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे छोटे कारोबार करने वाले दुकानदार भी कई बार महीने में ₹1 लाख से अधिक का UPI भुगतान प्राप्त कर लेते हैं।
सरकार और NPCI से फैसला वापस लेने की मांग
चेंबर महामंत्री मनोज कटारे ने बताया कि विंध्य चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने भारत सरकार, वित्त मंत्रालय और NPCI से प्रस्तावित MDR व्यवस्था को वापस लेने की मांग की है।
चेंबर की प्रमुख मांगें हैं-
- ₹2000 से अधिक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR को तत्काल वापस लिया जाए।
- P2M और P2P दोनों तरह के UPI ट्रांजैक्शन को पहले की तरह निःशुल्क रखा जाए।
प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों को भेजा जाएगा ज्ञापन
मनोज कटारे ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि चेंबर की ओर से इस संबंध में प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और वाणिज्य मंत्री को ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया गया है।
चेंबर ने कहा है कि यदि प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था वापस नहीं ली जाती है तो विंध्य क्षेत्र के सभी व्यापारिक संगठन संयुक्त रूप से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। अब व्यापारिक संगठनों की नजर सरकार और NPCI के अगले कदम पर है।
- Vindhya-Chamber-opposes-0-4-percent-MDR-on-UPI-merchant-payments








