
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में कथित हिंसा और नियमों के उल्लंघन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में शुक्रवार को फिर सुनवाई हुई। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नॉर्थ कैंपस में बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के कथित काफिले पर पुलिस से सवाल किया और पूछा कि भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद ऐसे वाहनों को परिसर में प्रवेश की अनुमति कैसे मिली।
पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की स्टेटस रिपोर्ट
DUSU चुनाव के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और चुनाव आचार संहिता के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई फिर शुरू की। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है।
यह मामला चुनाव प्रचार के दौरान सामने आई कथित हिंसक घटनाओं के बाद हाईकोर्ट पहुंचा था। इससे पहले अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय और पुलिस से घटनाओं पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी और कहा था कि चुनाव प्रक्रिया में हिंसा और अराजकता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों पर कोर्ट ने उठाए सवाल
शुक्रवार की सुनवाई में हाईकोर्ट की पीठ ने नॉर्थ कैंपस में बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के कथित काफिले को लेकर दिल्ली पुलिस के डीसीपी से सवाल किया। कोर्ट ने तस्वीरों का हवाला देते हुए पूछा कि जब बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे, तब ऐसे वाहनों को परिसर में प्रवेश की अनुमति कैसे दी गई।
अदालत ने यह भी कहा कि तस्वीरों में दिखाई दे रहे वाहनों के मामले से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे पहले याचिका में भी चुनाव प्रचार के दौरान बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के इस्तेमाल और अन्य नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए थे।
हिंसा और तोड़फोड़ को लेकर पहले भी सख्त हुई थी अदालत
इससे एक दिन पहले हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार से चुनाव प्रचार के दौरान हुई घटनाओं पर जवाब मांगा था। कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि यदि कार्रवाई से वह संतुष्ट नहीं हुआ तो मतगणना रोकने और परिणाम घोषित करने पर रोक लगाने जैसे सख्त निर्देश दिए जा सकते हैं। हालांकि अदालत ने उस समय चुनाव को स्थगित करने का आदेश नहीं दिया था।
आज हो रहा है मतदान
DUSU चुनाव के लिए शुक्रवार, 18 सितंबर को मतदान हो रहा है। चुनाव प्रचार बुधवार को समाप्त हो चुका था। इस दौरान हिंसा, तोड़फोड़, पोस्टर-बैनर और कथित चुनाव नियमों के उल्लंघन को लेकर विवाद सामने आया था। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया में Lyngdoh Committee की सिफारिशों के पालन पर भी जोर दिया है।
मतगणना और परिणाम घोषित करने को लेकर अदालत की अगली कार्रवाई अब पुलिस और विश्वविद्यालय की ओर से दाखिल रिपोर्ट तथा कोर्ट की संतुष्टि पर निर्भर करेगी।
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