रायसेन, 6 अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित छींद धाम भगवान हनुमान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। बरेली के पास स्थित इस मंदिर में मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त यहां भगवान हनुमान को प्यार से ‘दादाजी’ कहकर पुकारते हैं। मंदिर से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं इसे विशेष पहचान देती हैं। इनमें लगातार पांच मंगलवार दर्शन करने की मान्यता सबसे ज्यादा चर्चित है। रायसेन जिला प्रशासन के अनुसार छींद धाम गैरतगंज तहसील में स्थित प्रमुख हनुमान मंदिर और धार्मिक केंद्र है।

200 साल से ज्यादा पुराना बताया जाता है छींद धाम का इतिहास

छींद धाम के इतिहास को लेकर स्थानीय स्तर पर कई जनश्रुतियां प्रचलित हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार मंदिर का इतिहास करीब 200 साल से ज्यादा पुराना बताया जाता है। कहा जाता है कि पहले यहां कृषि भूमि थी और खेती के दौरान हनुमान जी की प्रतिमा मिलने के बाद उसी स्थान पर छोटी मढ़िया बनाकर पूजा शुरू की गई। समय के साथ यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई और यह स्थान एक बड़े धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो गया। मंदिर की स्थापना को लेकर अलग-अलग कथाएं भी प्रचलित हैं, इसलिए इन जानकारियों को स्थानीय मान्यता और जनश्रुति के रूप में ही देखा जाता है।

छींद धाम में भगवान हनुमान की प्रतिमा को दक्षिणमुखी बताया जाता है। मंदिर परिसर में पीपल के पेड़ के नीचे स्थित हनुमान जी के इस स्वरूप को लेकर भी श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दक्षिणमुखी हनुमान की पूजा को संकट निवारण से जोड़ा जाता है।

यही वजह है कि दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामना लेकर यहां पहुंचते हैं। मंगलवार और शनिवार को मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या विशेष रूप से बढ़ जाती है।

पांच मंगलवार की हाजिरी को लेकर क्या है मान्यता?

छींद धाम की सबसे चर्चित परंपराओं में लगातार पांच मंगलवार मंदिर में हाजिरी लगाना शामिल है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु लगातार पांच मंगलवार यहां पहुंचकर दादाजी के दर्शन और पूजा करता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है। यह विश्वास वर्षों से भक्तों के बीच प्रचलित है। मनोकामना पूरी होने के बाद कई श्रद्धालु मंदिर में भंडारा कराते हैं और प्रसाद वितरित करते हैं। भजन-कीर्तन और सुंदरकांड जैसे धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं।

मंदिर से जुड़ी मान्यताओं में नारियल, ध्वज और चोला अर्पित करने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना के साथ नारियल अर्पित करते हैं और इच्छा पूरी होने के बाद दोबारा मंदिर पहुंचकर पूजा करते हैं।

हालांकि, पांच मंगलवार में मनोकामना पूरी होने जैसी बातें धार्मिक आस्था और लोक-मान्यता हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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छींद धाम की सबसे अलग पहचान यहां भगवान हनुमान को ‘दादाजी’ कहकर संबोधित करना है। भक्त उन्हें परिवार के बड़े बुजुर्ग की तरह मानते हैं और अपनी परेशानियां उनके सामने रखते हैं। किसी भक्त की मनोकामना पूरी होने के बाद भंडारा कराने की परंपरा भी इसी आस्था का हिस्सा है। मंदिर में मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ रहती है। धार्मिक पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है।

रायसेन जिला प्रशासन के अनुसार मंदिर प्राकृतिक वातावरण और हरियाली के बीच स्थित है। यहां श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं और यह स्थान धार्मिक पर्यटन के रूप में भी पहचान बना रहा है।

कैसे पहुंचें छींद धाम?

छींद धाम रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील में स्थित है। यह रायसेन, बरेली, गैरतगंज और भोपाल से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। जिला प्रशासन के अनुसार भोपाल का राजा भोज एयरपोर्ट यहां का प्रमुख हवाई संपर्क है और करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर बताया गया है।

श्रद्धालु निजी वाहन, बस या टैक्सी के जरिए मंदिर पहुंच सकते हैं। मंगलवार और शनिवार को भीड़ अधिक होने के कारण यात्रा से पहले स्थानीय यातायात और दर्शन व्यवस्था की जानकारी लेना बेहतर रहेगा।

छींद धाम की पहचान सिर्फ एक मंदिर के रूप में नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र के रूप में बनी है। पांच मंगलवार की हाजिरी, भंडारे और दादाजी के प्रति भक्तों का विश्वास इस धाम को अलग पहचान देता है। यहां होने वाले चमत्कारों के दावे धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं, जबकि मंदिर की वास्तविक पहचान इसकी लंबे समय से चली आ रही श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी है।

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