
मध्य प्रदेश में बस किराए में हालिया बढ़ोतरी को लेकर सरकार एक बार फिर समीक्षा के मूड में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यात्रियों से मिले फीडबैक के बाद परिवहन विभाग को किराया वृद्धि की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, सैंडिपनी स्कूलों को लेकर सरकार के फैसलों से शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की दिशा भी साफ होती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार के इन फैसलों का असर आम यात्रियों और विद्यार्थियों पर पड़ने की उम्मीद है।
बस किराया बढ़ने से यात्रियों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
मध्य प्रदेश में करीब पांच साल बाद अगस्त 2026 में यात्री बसों के किराए में बढ़ोतरी की गई थी। सामान्य बस का किराया 1.25 रुपये से बढ़ाकर 2 रुपये प्रति यात्री प्रति किलोमीटर किया गया। न्यूनतम किराया भी 7 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया।
इसके अलावा बसों की अलग-अलग श्रेणियों के लिए सामान्य किराए से अतिरिक्त दरें निर्धारित की गईं। नॉन-एसी डीलक्स बस के लिए 25 प्रतिशत, स्लीपर के लिए 40 प्रतिशत, एसी डीलक्स के लिए 50 प्रतिशत और सुपर लग्जरी एसी बस के लिए 75 प्रतिशत तक अतिरिक्त किराया तय किया गया।
यात्रियों के फीडबैक के बाद मोहन यादव ने दिए समीक्षा के निर्देश
मुख्यमंत्री मोहन यादव को प्रदेश के अलग-अलग जिलों के दौरे के दौरान यात्रियों से बस किराए को लेकर लगातार शिकायतें और सुझाव मिले। यात्रियों का कहना था कि बढ़ा हुआ किराया खासकर कमजोर और मध्यम आय वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को मौजूदा किराया दरों का दोबारा परीक्षण करने के निर्देश दिए। सरकार का कहना है कि किराया तय करते समय यात्रियों के हित के साथ निजी बस संचालकों की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
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सैंडिपनी स्कूलों को लेकर भी सरकार का फोकस
मध्य प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था में सैंडिपनी स्कूलों को विकसित करने पर भी जोर दे रही है। राज्य सरकार ने पहले CM Rise School का नाम बदलकर सैंडिपनी स्कूल करने का फैसला लिया था। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देने वाली योजनाओं में भी सैंडिपनी स्कूलों को जोड़ने की बात सामने आई है। अप्रैल 2026 में सरकार ने 100 से अधिक आबादी वाले गांवों और बसाहटों के साथ सैंडिपनी स्कूलों तक सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 7,135 सड़कों की योजना की जानकारी दी थी।
वहीं, ताजा जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश सरकार 20,456 निजी स्कूलों को RTE के तहत 2024-25 सत्र की फीस प्रतिपूर्ति के लिए 502 करोड़ रुपये जारी करने की तैयारी में है। इसी कार्यक्रम में सैंडिपनी स्कूल के नए भवन का उद्घाटन भी प्रस्तावित है।
आगे क्या होगा?
बस किराए को लेकर अब परिवहन विभाग निजी बस संचालकों के साथ चर्चा करेगा। सरकार के सामने चुनौती यात्रियों को राहत देने और बस ऑपरेटरों की लागत के बीच संतुलन बनाने की है। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में सैंडिपनी स्कूलों को लेकर सरकार की योजनाएं आने वाले समय में और स्पष्ट होंगी।
फिलहाल बस किराया समीक्षा से यात्रियों को राहत की उम्मीद है। सरकार द्वारा अंतिम निर्णय लिए जाने के बाद नई किराया दरों को लेकर तस्वीर साफ होगी।
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