
कृष्णपाल पाल, करैरा, शिवपुरी में अमूल प्लांट को लेकर किसानों की समस्याएं अब प्रशासन तक पहुंच गई हैं। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रदेश सचिव हरिसिंह बैसला गुर्जर और प्रदेश सचिव फौजी रामनिवास गुर्जर ने एसडीएम के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसानों के भुगतान, दूध के रेट, फैट-एसएनएफ कटौती, बिल और दूध रिजेक्ट करने की प्रक्रिया समेत 9 बिंदुओं पर जांच की मांग की गई है।
भुगतान और दूध के रेट को लेकर उठाए सवाल
पार्टी नेताओं ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि कुछ किसानों का भुगतान रोका गया है। उन्होंने संबंधित मामलों की जांच कर जिम्मेदार पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इसके अलावा करैरा अमूल प्लांट में दूध के रेट अन्य अमूल प्लांटों की तुलना में कम होने का दावा करते हुए इसके कारणों की जांच की मांग की गई है। ज्ञापन में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि प्लांट का संचालन मध्यप्रदेश सरकार से संबंधित है तो दूसरे राज्यों से दूध मंगाने और स्थानीय किसानों की अनदेखी किए जाने के आरोपों की भी जांच होनी चाहिए।
शाखा और कटौती से जुड़े आरोपों की जांच की मांग
ज्ञापन में किसानों से शाखा देने के नाम पर कथित तौर पर 50 हजार से एक लाख रुपये तक की वसूली के आरोप लगाए गए हैं। पार्टी ने इस मामले की जांच की मांग की है।
किसानों के दूध में दो से तीन फैट और एसएनएफ की कथित कटौती किए जाने की शिकायत भी ज्ञापन में शामिल है। नेताओं का कहना है कि दूध की गुणवत्ता जांच और कटौती की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसानों को उनके दूध का उचित भुगतान मिल सके।
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बिल और डेटा उपलब्ध नहीं होने का मामला
आजाद समाज पार्टी ने किसानों को बिल नहीं मिलने की शिकायत भी उठाई है। ज्ञापन के अनुसार, कई किसानों को आठ महीने से अधिक समय से डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया है। पार्टी ने इस पूरे रिकॉर्ड की जांच कर किसानों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।
इसके अलावा प्लांट के बाहर रिजेक्ट किए गए दूध की खरीद, उसमें कथित हिस्सेदारी और दूध रिजेक्ट करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने इन मामलों की जांच की मांग की है।
किसानों को धमकी देने के आरोप भी ज्ञापन में शामिल
ज्ञापन में यह आरोप भी लगाया गया है कि अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाने वाले किसानों को शाखा बंद करने या दूध वाहन हटाने की कथित धमकियां दी जाती हैं। पार्टी नेताओं ने इन शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
हरिसिंह बैसला गुर्जर और फौजी रामनिवास गुर्जर ने प्रशासन से मांग की कि किसानों की शिकायतों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही भुगतान और दूध की गुणवत्ता से जुड़ी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
करैरा अमूल प्लांट से जुड़े किसानों की समस्याओं को लेकर सौंपे गए ज्ञापन में कुल 9 बिंदुओं पर जांच की मांग की गई है। फिलहाल ये आरोप और शिकायतें ज्ञापन में उठाए गए पक्ष पर आधारित हैं। अब प्रशासन की जांच और संबंधित पक्ष के जवाब के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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