
मैहर के रामनगर स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (ITI) में वित्तीय अभिलेखों के कथित अनधिकृत रखरखाव और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के संबंध में भ्रामक जानकारी दिए जाने का मामला सामने आया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए विद्युतकार टीओ मनोज तिवारी को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1965 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
वित्तीय अभिलेखों के रखरखाव पर उठे सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आईटीआई रामनगर में वित्तीय अभिलेखों को कथित तौर पर अनधिकृत रूप से रखे जाने को लेकर विभागीय स्तर पर मामला सामने आया। इसी दौरान विभाग से संबंधित सीएम हेल्पलाइन शिकायत के संबंध में दी गई जानकारी को भी अधिकारियों ने गंभीरता से लिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायत और अभिलेखों की स्थिति से जुड़ी जानकारी में कथित विसंगतियों को देखते हुए मनोज तिवारी से स्पष्टीकरण मांगा गया। विभागीय कार्रवाई के तहत उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
3 फरवरी को मांगा गया था जवाब
जानकारी के अनुसार, नोटिस में मनोज तिवारी से 3 फरवरी 2026 को अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया था। हालांकि, उनके जवाब में क्या तर्क दिए गए और विभागीय जांच में अब तक क्या निष्कर्ष सामने आए हैं, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
ऐसे में अब सवाल यह है कि विभागीय स्तर पर जांच की स्थिति क्या है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ आगे किस स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी आरोप को अंतिम रूप से सिद्ध मानने से पहले विभागीय जांच और सक्षम अधिकारी के निर्णय का इंतजार करना जरूरी है।
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संयुक्त संचालक ने संचालनालय को पत्र भेजने की बात कही
मामले को लेकर संयुक्त संचालक कौशल विकास रीवा सौरभ शुक्ला से फोन पर चर्चा किए जाने का दावा रिपोर्ट में किया गया है। उनके अनुसार, आगे की कार्रवाई के लिए संचालनालय कौशल विकास, भोपाल को पत्र भेजा जा चुका है। कार्रवाई का निर्धारण अब संचालनालय स्तर से किया जाना है।
इस बयान के बाद विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया और उसके अगले चरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि जांच और पत्राचार की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो अंतिम कार्रवाई का आदेश कब जारी होगा, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
कार्रवाई के आदेश का इंतजार
मामले में अब मुख्य रूप से विभागीय जांच के निष्कर्ष और संचालनालय स्तर से होने वाली कार्रवाई पर नजर है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह मामला नोटिस, स्पष्टीकरण और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया में है। संबंधित अधिकारी का विस्तृत पक्ष और जांच का अंतिम निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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