ब्रांडवाणी समाचार विशेष खुलासा, एनएचएम से जल निगम तक करोड़ों का खेल, चार्टर्ड अकाउंटेंट भावना भारती और अफसरों की जुगलबंदी पर खामोश क्यों है सरकार?

ब्रांडवाणी समाचार खुलासा: एनएचएम में अरबों का गड़बड़झाला और जल निगम में फर्जी बैंक गारंटी पर खामोशी – सीए भावना भारती और अफसरशाही की सांठ-गांठ पर कब होगी एफआईआर और जेल?

नमस्कार, आज हम खोलने जा रहे हैं मध्य प्रदेश की अफसरशाही और सफेदपोश भ्रष्टाचार के वो दस्तावेज़ जिसे देखकर आपके पैरों तले ज़मीन खिसक जाएगी। सवाल यह है कि जब एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की गलती या साज़िश से सरकार के सैकड़ों करोड़ रुपये दांव पर लग जाएं, बैंक खाते फ्रीज़ हो जाएं, और फिर वही शख्स दूसरे बड़े विभाग में जाकर फर्जी बैंक गारंटी के खेल में शामिल हो जाए, तो आखिरकार आईएएस अफसर और मंत्रालय के आला कारकुन उस पर कार्रवाई करने के बजाय मेहरबान क्यों रहते हैं?

आखिर मध्य प्रदेश जल निगम मर्यादित के प्रबंध संचालक (एमडी) के.वी.एस. चौधरी (आईएएस) और अपर मुख्य सचिव सचिन सिन्हा ने सीए भावना भारती पर अब तक कोई कठोर एक्शन क्यों नहीं लिया? क्यों वर्षों से दो-दो इंक्रीमेंट देकर ऐसी लापरवाही को पुरस्कृत किया जा रहा है? आइए देखते हैं दस्तावेज़ों के साथ ब्रांडवाणी समाचार की यह विशेष पड़ताल।”

1. एनएचएम में अरबों की गड़बड़ी, सरकारी धन का नुकसान

ब्रांडवाणी समाचार के हाथ लगे आधिकारिक पत्र (क्रमांक: एन.एच.एम./वित्त/2018/470-471, दिनांक: 15.01.2019) के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) मध्य प्रदेश में तत्कालीन चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रीमती भावना भारती द्वारा वित्तीय वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 के आयकर रिटर्न और वैधानिक अंकेक्षण में ऐसी घोर लापरवाही की गई जिससे पूरा विभाग कानूनी पचड़े में उलझ गया।

  • दस्तावेज़ के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2014-15 में वास्तविक प्राप्त राशि ₹1,226.83 करोड़ के स्थान पर ₹2,475.21 करोड़ का अनुदान दर्शाया गया।
  • इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2015-16 में वास्तविक प्राप्त राशि ₹1,711.87 करोड़ के स्थान पर ₹2,121.05 करोड़ का अनुदान दर्शाया गया।
  • इस गलत विवरणी के आधार पर आयकर विभाग द्वारा संस्था के पास शेष राशि ₹734.61 करोड़ की गणना कर दी गई और ₹348.79 करोड़ के आयकर की भारी-भरकम मांग निकाल दी गई।
  • आयकर विभाग ने राज्य स्वास्थ्य समिति के बैंक खाते तक फ्रीज़ कर दिए। विभाग को माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर करनी पड़ी, जिसमें अत्यधिक सरकारी धन व्यय हुआ और शासकीय हानि हुई।
  • संचालक वित्त (एनएचएम) द्वारा स्पष्ट तौर पर लिखा गया कि यह त्रुटि कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही को प्रदर्शित करती है तथा इससे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की छवि धूमिल हुई और अनावश्यक धन की हानि हुई।

यह पत्र उसी समय मध्य प्रदेश जल निगम मर्यादित को भेजकर कारण बताओ सूचना पत्र के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर आगामी कार्रवाई प्रस्तावित करने हेतु भेजा गया था। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि, आखिर क्या कार्रवाई हुई? किसी ने एक्शन क्यों नहीं लिया?

2. जल निगम में ‘फर्जी बैंक गारंटी‘ का नया खेल

एनएचएम के बाद यह संदिग्ध खेल मध्य प्रदेश जल निगम मर्यादित में और आगे बढ़ा। पंजाब नेशनल बैंक (शाखा: बागूईहाटी, कोलकाता) के पत्र दिनांक 15-06-2023 के अनुसार, मैसर्स तीर्थ गोपीकॉन लिमिटेड (इंदौर) के मोबिलाइजेशन एडवांस के नाम पर जो दो बैंक गारंटियां (बीजी नंबर 00159/BG/103910/2023 राशि ₹16,20,00,000/- एवं बीजी नंबर 00157/BG/103910/2023 राशि ₹19,60,00,000/- कुल मिलाकर ₹35.80 करोड़) प्रस्तुत की गई थीं, बैंक ने स्पष्ट प्रमाणित किया कि:

“उपरोक्त दोनों बैंक गारंटियां वास्तविक नहीं हैं (फर्जी हैं), जिन्हें प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश जल निगम मर्यादित, भोपाल के पक्ष में जारी दिखाया गया है।”

बैंक साफ कह रहा है कि यह बैंक गारंटी उन्होंने जारी ही नहीं की, यानी यह पूरी तरह से फर्जी थीं। इतने बड़े 35.80 करोड़ से अधिक के फर्जीवाड़े पर जल निगम के प्रबंध संचालक के.वी.एस. चौधरी (आईएएस) और शासन के अपर मुख्य सचिव सचिन सिन्हा द्वारा कठोर आपराधिक मामला क्यों दर्ज नहीं करवाया गया? सीए भावना भारती, जिन्होंने एनएचएम में घोर गड़बड़ी की थी, उनकी मौजूदगी और निगरानी में जल निगम के वित्तीय मामलों में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? क्या दीपम  राय चूरा और सीए भावना भारती दोनों के लिए अलग-अलग कानून बने है या इसमे सारे अधिकारियों की गदहजोड़ है दाल का एक दाना नहीं बल्कि पूरी दाल काली है ?

3. अफसरों की जुगलबंदी या भ्रष्टाचार का संरक्षण?

  • ब्रांडवाणी समाचार सीधे सवाल पूछता है: एक पेशेवर चार्टर्ड अकाउंटेंट से इतनी बड़ी चूक कैसे हो सकती है? यह केवल अनजाने में हुई भूल नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित बड़े घोटाले की तरफ इशारा करता है। चूक एक बार होती है लेकिन इतने पेमेंट बार-बार करना मतलब सुनियोजित चाल है
  • आखिर वर्षों से किस नियम के तहत दो-दो इंक्रीमेंट दिए जाते रहे? जब एनएचएम ने उनके खिलाफ लिखित में भेजा था, तो उन्हें दूसरे महत्वपूर्ण विभाग में बैठाकर पदोन्नति और बढ़ावा क्यों दिया गया?
  • शासन, प्रशासन और मंत्रालय के बीच ऐसी कौन सी अदृश्य जुगलबंदी है जो ऐसी गंभीर लापरवाहियों और करोड़ों के संदिग्ध लेन-देन पर पर्दा डाल रही है?
  • आम कर्मचारी यदि कोई छोटी सी गलती भी कर दे, तो उसका वेतन रोक दिया जाता है या तत्काल निलंबन (सस्पेंशन) आदेश जारी हो जाता है। लेकिन यहां न कोई निलंबन होता है, न एफआईआर होती है और न ही जेल भेजा जाता है। क्या यह सच है कि रसूख और सांठ-गांठ के दम पर जांच फाइलों को दबा दिया जाता है? हाल ही मे दीपम राय चूरा आबकारी अधिकारी को निलंबन 2.5 करोड़ के लिए किया गया और 35.80 करोड़ की ‘फर्जी बैंक गारंटी‘ के लिए अलग नियम ऐसा लगता छोटे घोटाले पर सरकार की सजा और बड़े घोटाले पर दो-दो इंक्रीमेंट दिए जाते है देखना है की सरकार का सच मे दोहरा चरित्र है या कानून सब के लिए एक है।

4. क्या आईसीएआई रजिस्ट्रेशन रद्द होगा या बात दबाई जाएगी?

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) के सख्त नियम हैं कि पेशेवर कदाचार या घोर वित्तीय लापरवाही पर संबंधित सीए का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।

  • क्या शासन ने भावना भारती के खिलाफ आईसीएआई को उनका लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन रद्द करने के लिए पत्र लिखा?
  • क्या उन वरिष्ठ अधिकारियों पर विभागीय जांच और एफआईआर दर्ज होगी जो इस पूरे मामले को वर्षों से ठंडे बस्ते में डाले बैठे हैं?

5. विपक्ष, संगठन और जांच एजेंसियों की परीक्षा

  • विपक्ष की भूमिका: मध्य प्रदेश का विपक्ष आम जनता के मुद्दे उठाने का दावा करता है, लेकिन करोड़ों रुपये के आयकर नुकसान और फर्जी बैंक गारंटी के इस गंभीर मामले पर खामोश क्यों है? क्या विपक्ष सड़क पर उतरकर जनता के हक के लिए आवाज उठाएगा?
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जो राष्ट्रहित, आदिवासियों और ग्रामीण विकास के लिए ज़मीनी स्तर पर काम करने की बात करता है—क्या वह संगठन इतने बड़े वित्तीय भ्रष्टाचार और घोटाले पर सरकार व अफसरशाही के खिलाफ आवाज उठाएगा?
  • ईओडब्ल्यू, लोकायुक्त, ईडी और सीबीआई: आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), लोकायुक्त, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई जैसी प्रमुख जांच एजेंसियां क्या इस करोड़ों के घोटाले, फर्जी बैंक गारंटी के नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू पर स्वतः संज्ञान लेंगी? या फिर यह मामला भी मंत्रालय के गलियारों में हमेशा के लिए दबा दिया जाएगा?

“ब्रांडवाणी समाचार शासन और प्रशासन से दो-टूक मांग करता है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च-स्तरीय जांच हो, सीए भावना भारती सहित संलिप्त सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कानूनी कार्रवाई हो और शासकीय छवि व जनता की गाढ़ी कमाई को नुकसान पहुंचाने वालों को सलाखों के पीछे भेजा जाए। हम इस खबर के प्रत्येक पहलू पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं। देखते रहिए ब्रांडवाणी समाचार।”

  • Shruti Soni

    ब्रांडवाणी समाचार

    अनुभवी पत्रकार। हर दिन ताज़ा और सटीक खबरों के साथ आपकी सेवा में। निष्पक्ष रिपोर्टिंग और गहराई से तथ्य प्रस्तुत करना मेरी पहचान है।

    Related Posts

    राहुल गांधी की हुंकार, प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को खुली बहस की चुनौती, क्या जवाब देगी सरकार जानिए क्या है सच  ब्रांडवाणी समाचार विशेष?

    नमस्कार, आप देख रहे हैं ब्रांडवाणी समाचार। भारतीय राजनीति…

    जल निगम मर्यादित और जल जीवन मिशन मे खेल कैसे होते हैं जानने के लिए पूरा पढे,फर्जी बैंक गारंटी का मायाजाल और नियमों की सरेआम नीलामी की मिलेगी जानकारी?

    मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार की जड़ें किस कदर सरकारी…

    You Missed

    Ultraviolette का AI स्मार्ट हेलमेट लॉन्च! हाई-टेक फीचर्स और फ्यूचरिस्टिक लुक ने खींचा सबका ध्यान

    Ultraviolette का AI स्मार्ट हेलमेट लॉन्च! हाई-टेक फीचर्स और फ्यूचरिस्टिक लुक ने खींचा सबका ध्यान

    शिवराज सिंह चौहान की मां काशी बाई का निधन, जैत में आज अंतिम संस्कार

    शिवराज सिंह चौहान की मां काशी बाई का निधन, जैत में आज अंतिम संस्कार

    चक्रवात अर्नब कमजोर, बंगाल की खाड़ी में फिर बन रहा नया सिस्टम, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

    चक्रवात अर्नब कमजोर, बंगाल की खाड़ी में फिर बन रहा नया सिस्टम, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

    MP Travel Mart 2026 में पर्यटन को बड़ा निवेश, 3,700 करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव

    MP Travel Mart 2026 में पर्यटन को बड़ा निवेश, 3,700 करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव

    हैरी केन ने जीता बैलन डी’ओर 2026, 25 साल बाद इंग्लैंड का कमाल

    हैरी केन ने जीता बैलन डी’ओर 2026, 25 साल बाद इंग्लैंड का कमाल