
मध्य प्रदेश में नाप-तौल व्यवस्था से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। इसके साथ ही विभाग से जुड़ी छह सेवाओं को लोक सेवा गारंटी व्यवस्था से बाहर किए जाने की जानकारी सामने आई है। सरकार ने नियमों में बदलाव का उद्देश्य व्यवस्था को सरल बनाने, अनावश्यक प्रक्रियाओं को कम करने और व्यापार से जुड़े अनुपालन का बोझ घटाने से जोड़ा है। यह बदलाव विधिक मापविज्ञान यानी नाप-तौल व्यवस्था से संबंधित है, जिसका सीधा संबंध बाजार में वस्तुओं की सही मात्रा और माप की शुद्धता से है।
नाप-तौल व्यवस्था में क्या बदला?
मध्य प्रदेश सरकार ने विधिक मापविज्ञान नियम, 2011 में संशोधन को मंजूरी दी है। यह बदलाव केंद्र सरकार के जनविश्वास कानून में किए गए संशोधनों को राज्य में लागू करने और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में किया गया है। इसके अलावा नाप-तौल उपकरणों के सत्यापन शुल्क में संशोधन भी इसका हिस्सा है।
विधिक मापविज्ञान व्यवस्था के तहत दुकानों, कारोबारियों और विभिन्न संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले वजन और माप उपकरणों की शुद्धता सुनिश्चित की जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को सामान खरीदते समय सही मात्रा मिले।
छह सेवाओं को लोक सेवा गारंटी से बाहर करने का क्या मतलब?
इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विभाग की कुछ सेवाओं को लोक सेवा गारंटी कानून के तहत तय समयसीमा वाली सेवाओं की सूची से बाहर करना है। इसका असर उन कारोबारियों और संस्थानों पर पड़ सकता है जो नाप-तौल उपकरणों की अनुज्ञप्ति, सत्यापन या उससे जुड़ी प्रशासनिक सेवाओं के लिए आवेदन करते हैं।
मध्य प्रदेश के विधिक मापविज्ञान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर अनुज्ञप्ति, पैकर पंजीयन और नाप-तौल उपकरणों के सत्यापन से जुड़ी सेवाओं की जानकारी उपलब्ध है। विभाग ने इन सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन और प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की व्यवस्था भी दी है।
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व्यापारियों और कारोबारियों पर क्या असर पड़ेगा?
नियमों में बदलाव का उद्देश्य कारोबारियों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना बताया गया है। पहले किसी अनुज्ञप्ति या सत्यापन प्रक्रिया में तय दस्तावेज, शुल्क और समयसीमा का पालन जरूरी था। संशोधित व्यवस्था में अनुपालन से जुड़े कुछ प्रावधानों को सरल करने पर जोर दिया गया है।
विधिक मापविज्ञान कानून के तहत वजन या माप का निर्माण, मरम्मत या बिक्री करने वाले कारोबारियों के लिए अनुज्ञप्ति व्यवस्था पहले से लागू रही है। मध्य प्रदेश के पुराने नियमों में निर्माता, मरम्मतकर्ता और विक्रेता के लिए अलग-अलग अनुज्ञप्ति शुल्क निर्धारित थे।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर भी रहेगी नजर
नियमों को सरल करने का मतलब यह नहीं है कि बाजार में नाप-तौल की जांच खत्म हो जाएगी। विधिक मापविज्ञान व्यवस्था का मूल उद्देश्य ही व्यापार में इस्तेमाल होने वाले वजन और माप की शुद्धता सुनिश्चित करना है।
केंद्र सरकार भी विधिक मापविज्ञान को उपभोक्ताओं के हितों और माप की सटीकता की गारंटी से जोड़ती है। इसलिए नियमों में बदलाव के साथ विभाग के निरीक्षण और निगरानी तंत्र की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या?
सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि प्रक्रियाओं को सरल करने के साथ उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा भी बनी रहे। खासकर बाजार में कम वजन देना, गलत माप उपकरण का इस्तेमाल करना या पैकबंद वस्तुओं पर गलत मात्रा दर्ज करना जैसी शिकायतों पर निगरानी कमजोर नहीं होनी चाहिए।
ऐसे में छह सेवाओं को लोक सेवा गारंटी से बाहर करने के बाद विभाग की जवाबदेही और शिकायत निवारण की व्यवस्था किस तरह काम करेगी, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा।
मध्य प्रदेश में नाप-तौल से जुड़े नियमों में बदलाव का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाना और कारोबारियों का अनुपालन बोझ कम करना बताया गया है। लेकिन इस बदलाव के साथ उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा और विभागीय निगरानी भी उतनी ही जरूरी होगी। अब देखना होगा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कारोबारियों को कितनी राहत मिलती है और नाप-तौल में गड़बड़ी रोकने की व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है।
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