
मैहर/रामनगर। मैहर जिले के रामनगर विकासखंड क्षेत्र के जनशिक्षक केंद्र गोरहाई अंतर्गत गुरजनहा-भरतपुर में ईजीएस गुरुजी की नियुक्ति को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गैलहरी निवासी रमेश जायसवाल, पिता रामचरण जायसवाल, कथित तौर पर कटनी-भरतपुर निवासी रमेश जायसवाल, पिता जगदीश जायसवाल के नाम से जुड़ी नियुक्ति के आधार पर वर्षों से सेवा कर रहे हैं। आरोपों की पुष्टि दस्तावेजों की आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
नियुक्ति सूची और निवास को लेकर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि गैलहरी निवासी रमेश जायसवाल का नाम भरतपुर ग्राम पंचायत की अनुमोदन सूची में नहीं है। साथ ही गुरजनहा-भरतपुर ईजीएस केंद्र से संबंधित छात्र सूची और अन्य दस्तावेजों में भी उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित व्यक्ति भरतपुर का निवासी नहीं थे और वहां की मतदाता सूची में भी उनका नाम नहीं मिलता। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि यदि नियुक्ति के लिए स्थानीय निवास और अन्य निर्धारित दस्तावेज जरूरी थे, तो संबंधित नियुक्ति प्रक्रिया किस आधार पर पूरी हुई।
वर्ष 2004 के प्रशिक्षण दस्तावेज भी जांच के घेरे में
मामले में वर्ष 2004 के प्रशिक्षण से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक 28 अक्टूबर 2004 को प्रशिक्षण से संबंधित प्रक्रिया में रमेश जायसवाल पिता जगदीश जायसवाल, कटनी-भरतपुर का नाम सामने आता है।
वहीं आरोप है कि बाद की सेवा पुस्तिका में नियुक्ति से जुड़े कुछ जरूरी दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मूल नियुक्ति रिकॉर्ड, निवास प्रमाण, पंचायत के अनुमोदन और प्रशिक्षण से संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जाना जरूरी है।
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सेवा पुस्तिका और वेतन भुगतान की प्रक्रिया पर सवाल
शिकायत का सबसे बड़ा सवाल सेवा पुस्तिका और वर्षों से हो रहे वेतन भुगतान को लेकर है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि यदि दस्तावेजों में नाम और पहचान को लेकर अंतर है, तो संबंधित व्यक्ति की सेवा अब तक किस आधार पर जारी रही।
पूर्व में भी इस मामले में कार्रवाई से संबंधित पत्र जारी होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने जनशिक्षक देवेंद्र बहादुर सिंह की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों या अन्य आरोपित पक्षों का पक्ष सामने आना बाकी है।
निष्पक्ष जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
मामले में शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सेवा पुस्तिका, नियुक्ति रिकॉर्ड, पंचायत की अनुमोदन सूची, मतदाता सूची, प्रशिक्षण दस्तावेज और वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए। यदि जांच में नियुक्ति नियमों के विपरीत पाई जाती है, तो नियमानुसार सेवा समाप्ति, वेतन वसूली या अन्य कानूनी कार्रवाई का सवाल उठ सकता है।
वहीं शिकायत में संबंधित शिक्षक के कथित मौखिक बयान का भी उल्लेख किया गया है। दावा है कि उन्होंने अपनी नियुक्ति को लेकर कुछ बातें जनशिक्षक देवेंद्र बहादुर सिंह से जुड़ी बताई थीं। इन दावों की पुष्टि स्वतंत्र जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से ही हो सकती है।
ईजीएस गुरुजी की नियुक्ति से जुड़ा मामला फिलहाल आरोप और दस्तावेजी दावों के स्तर पर है। वास्तविक स्थिति नियुक्ति रिकॉर्ड और सेवा पुस्तिका की आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। शिक्षा विभाग की निष्पक्ष जांच इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण होगी।








