जामड़ार नदी में रोहू, कतला और मृगल के मत्स्यबीज छोड़े गए

टीकमगढ़, 29 अक्टूबर 2026: जिले में नदी मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने और स्थानीय मछुआरों की आजीविका मजबूत करने के लिए मत्स्य विभाग ने पहल की है। नदी मत्स्य समूह कार्यक्रम के तहत जामड़ार नदी के कुण्डेश्वर घाट पर मत्स्य संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान रोहू, कतला और मृगल प्रजातियों के गुणवत्तापूर्ण मत्स्यबीज नदी में छोड़े गए। विभाग का उद्देश्य नदी में मछलियों की संख्या बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर मत्स्य उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।

कुण्डेश्वर घाट पर हुआ मत्स्यबीज संचयन

कार्यक्रम कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। मत्स्य विभाग की टीम ने जामड़ार नदी में उन्नत प्रजातियों के मत्स्यबीज का संचयन कराया। रोहू, कतला और मृगल को प्रमुख रूप से नदी में छोड़ा गया।

विभाग के अनुसार, इस तरह के मत्स्यबीज संचयन से नदी में मछलियों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही प्राकृतिक जलस्रोतों में मत्स्य संसाधनों के संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा।

स्थानीय मछुआरों को मिल सकता है रोजगार का लाभ

जामड़ार नदी में मत्स्य उत्पादन बढ़ने से क्षेत्र के स्थानीय मछुआरों को आने वाले समय में लाभ मिलने की संभावना है। मछलियों की उपलब्धता बढ़ने पर उनके लिए रोजगार के अवसर बेहतर हो सकते हैं। इससे मछुआरा परिवारों की आय में भी वृद्धि का रास्ता खुल सकता है।

मत्स्य विभाग की इस पहल को स्थानीय स्तर पर मछली उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नदी आधारित मत्स्य गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से मछुआरों की आजीविका को स्थायी आधार देने में मदद मिल सकती है।

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जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर भी जोर

मत्स्यबीज संचयन का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि नदी के जलीय संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देना भी है। रोहू, कतला और मृगल जैसी प्रजातियों के संचयन से नदी के मत्स्य संसाधनों को मजबूत करने की कोशिश की गई है।

हालांकि, इसका वास्तविक परिणाम आने वाले समय में मछलियों की वृद्धि और नदी में उनके संरक्षण पर निर्भर करेगा। इसके लिए विभागीय निगरानी और स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार मत्स्य गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी।

कार्यक्रम में अधिकारी और स्थानीय लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में जिला पंचायत टीकमगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विशाल धाकड़, सहायक संचालक मत्स्योद्योग मेधा गुप्ता, सरपंच-सचिव पंकज मौर्य, सहायक मत्स्य अधिकारी सहित स्थानीय लोग मौजूद रहे।

जामड़ार नदी में मत्स्यबीज संचयन के बाद अब विभाग की पहल का लाभ स्थानीय मछुआरों तक पहुंचने की उम्मीद है। आने वाले समय में नदी में मत्स्य उत्पादन में होने वाली वृद्धि से इस कार्यक्रम के प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

Srota Swati Tripathy

Srota Swati Tripathy

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