अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प को बड़ा झटका, दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का बहुमत

अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों—सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स—में बहुमत हासिल कर लिया है। इस चुनाव को ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती दो वर्षों के कामकाज पर जनता के फैसले के रूप में देखा जा रहा था। चुनाव में डेमोक्रेट्स ने कई ऐसे राज्यों में जीत दर्ज की, जिन्हें पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। टेक्सास, साउथ कैरोलिना, आयोवा और ओहायो जैसे राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की जीत ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए। इस परिणाम के बाद ट्रम्प के राष्ट्रपति कार्यकाल के बाकी दो वर्षों में कांग्रेस में उनकी पार्टी की पकड़ कमजोर हो गई है।

 

चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे अमेरिकी जनता की आर्थिक चिंताएं भी प्रमुख वजह बताई जा रही हैं। बढ़ती महंगाई, रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में इजाफा, ईंधन की महंगी कीमतें और ईरान के साथ युद्ध को लेकर असंतोष ने मतदाताओं के रुख को प्रभावित किया। चुनावी सर्वेक्षणों के मुताबिक, बड़ी संख्या में मतदाता देश की मौजूदा दिशा से नाराज थे और चाहते थे कि कांग्रेस राष्ट्रपति की शक्तियों पर प्रभावी नियंत्रण रखे। डोनाल्ड ट्रम्प ने चुनाव प्रचार के दौरान रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में कई रैलियां की थीं, लेकिन इसके बावजूद पार्टी को कई अहम सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। ट्रम्प ने चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर उनका नाम भी बैलेट पर होता, तो रिपब्लिकन पार्टी बड़े अंतर से जीत सकती थी।

 

अमेरिका के मिडटर्म चुनावों का इतिहास भी राष्ट्रपति की पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 21 में से 19 मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अपनी सीटें बढ़ाने में सफलता हासिल नहीं की। मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में होते हैं और इनमें कांग्रेस के सदस्यों का चुनाव किया जाता है। डेमोक्रेटिक पार्टी के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने के बाद अब वह ट्रम्प प्रशासन के फैसलों की जांच कर सकती है, सरकारी अधिकारियों को संसदीय समितियों के सामने बुला सकती है और कई विधायी प्रस्तावों को रोक सकती है। हालांकि, राष्ट्रपति के पास वीटो सहित कई संवैधानिक अधिकार बने रहेंगे। ऐसे में कांग्रेस में डेमोक्रेट्स का बहुमत ट्रम्प के लिए राजनीतिक और विधायी चुनौतियां बढ़ा सकता है।

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gaurav singh rajput

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