
मध्य प्रदेश में एडीशनल एसपी अमृतलाल मीणा के जाति प्रमाणपत्र से जुड़े मामले में कानूनी हलचल तेज हो गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने 28 अक्टूबर 2026 को अमृतलाल मीणा की याचिका स्वीकार करते हुए उनके जाति प्रमाणपत्र को बहाल कर दिया था। हाईकोर्ट ने राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसमें मीणा का अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाणपत्र रद्द किया गया था। अब इस मामले में मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता की ओर से डिवीजन बेंच में अपील दायर करने की राय दिए जाने की खबर सामने आई है। इस राय के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हाईकोर्ट के फैसले में अमृतलाल मीणा के पक्ष में विदिशा और गुना के पुलिस अधीक्षकों द्वारा की गई जांच रिपोर्टों को महत्वपूर्ण माना गया था। अदालत के अनुसार, दोनों जांच रिपोर्टों में मीणा और उनके पूर्वजों के मूल निवासी होने के संबंध में उनके पक्ष में निष्कर्ष दिए गए थे। हाईकोर्ट ने कहा था कि जाति छानबीन समिति ने इन रिपोर्टों को खारिज करते समय आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और शासन के निर्देशों का उचित पालन नहीं किया। अदालत ने यह भी माना कि समिति ने पूर्व की जांचों के रिकॉर्ड पर दोबारा भरोसा किया, जबकि पहले के आदेश में स्वतंत्र और नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया गया था। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने जाति प्रमाणपत्र रद्द करने के आदेश को निरस्त कर प्रमाणपत्र बहाल कर दिया।
अब महाधिवक्ता की कथित राय के बाद राज्य सरकार इस फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती देने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। हालांकि, अपील दायर किए जाने और उस पर सुनवाई की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि अलग से आवश्यक है। फिलहाल हाईकोर्ट का 28 अक्टूबर का आदेश अमृतलाल मीणा के जाति प्रमाणपत्र को बहाल करने वाला है। यदि राज्य सरकार डिवीजन बेंच में अपील करती है, तो मामले में आगे का निर्णय उच्च न्यायालय की अगली सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
- amritlal-meena-case-mp-advocate-general-division-bench-appeal








