
मध्य प्रदेश में थाना प्रभारी (TI) की हत्या के मामले ने कथित शराब तस्करी के बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। जांच में शराब तस्करी के संगठित नेटवर्क और उसके संचालन के तरीके को लेकर कई अहम खुलासे सामने आए हैं। आरोप है कि शराब की खेप को मध्य प्रदेश से गुजरात तक पहुंचाने के लिए तस्करों ने सुरक्षा की तीन परतों वाला सिस्टम तैयार किया था। इस नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर लोग शामिल रहते थे, जिनका काम रास्ते की निगरानी करना, पुलिस की गतिविधियों की जानकारी जुटाना और शराब से भरे ट्रकों को सुरक्षित आगे बढ़ाना था। TI की हत्या के बाद जांच एजेंसियों का ध्यान इस नेटवर्क की ओर गया, जिसके बाद तस्करी के पूरे सिस्टम की पड़ताल शुरू हुई।
कथित तौर पर शराब तस्करी के इस सिंडिकेट में एक ट्रक से करीब 10 लाख रुपये तक की कमाई होती थी। गुजरात में शराबबंदी के चलते वहां अवैध शराब की मांग और तस्करी के नेटवर्क को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। इस मामले में भी शराब की खेप को गुजरात पहुंचाने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है। थ्री लेयर सिक्योरिटी के तहत सबसे पहले रास्ते की जानकारी जुटाने वाले लोग सक्रिय रहते थे, इसके बाद आगे की निगरानी और ट्रक को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभाली जाती थी। इस तरह तस्करी के लिए एक व्यवस्थित नेटवर्क काम करने का आरोप है।
TI की हत्या के मामले ने इस पूरे कथित सिंडिकेट की जांच को निर्णायक मोड़ दिया है। पुलिस जांच में तस्करी के नेटवर्क से जुड़े लोगों, ट्रकों की आवाजाही, शराब की सप्लाई और अवैध कारोबार से होने वाली कमाई की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। एक ट्रक से 10 लाख रुपये तक की कमाई का दावा इस नेटवर्क के आर्थिक पैमाने को उजागर करता है। हालांकि, सिंडिकेट से जुड़े सभी आरोपों और उसकी पूरी संरचना की पुष्टि जांच के निष्कर्षों तथा आधिकारिक कार्रवाई के आधार पर ही की जा सकेगी। TI की हत्या से शुरू हुई जांच अब कथित शराब तस्करी के बड़े नेटवर्क तक पहुंचती दिखाई दे रही है।








