
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित नल के पानी से फैली बीमारी ने गंभीर रूप ले लिया है। अब तक इस हादसे में 24 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 16 मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 5 की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें ICU में रखा गया है। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही के आरोप तेज हो गए हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मेयर और स्थानीय पार्षद खुद मौके पर पहुंचे और नल का पानी पीकर हालात सामान्य होने का दावा किया। उनका कहना है कि अब सप्लाई किया जा रहा पानी सुरक्षित है, हालांकि स्थानीय लोगों में अब भी डर और आक्रोश बना हुआ है। लोगों का आरोप है कि लंबे समय से गंदे पानी की शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच में सामने आया है कि पानी की पाइपलाइन में सीवेज मिलावट के कारण संक्रमण फैला। दूषित पानी पीने से लोगों को उल्टी, दस्त, बुखार और डिहाइड्रेशन की शिकायत हुई, जिसके बाद हालात बिगड़ते चले गए। अस्पतालों में अभी भी मरीजों का इलाज जारी है और डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में पानी की सप्लाई अस्थायी रूप से बंद कर टैंकरों से साफ पानी उपलब्ध कराने का दावा किया है। साथ ही पाइपलाइन की जांच और मरम्मत के आदेश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना ने शहरी इलाकों में पेयजल की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।









