
आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका ने ग्रीनलैंड में अपना मिलिट्री एयरक्राफ्ट तैनात किया है। यह सैन्य विमान ग्रीनलैंड स्थित पिटुफिक स्पेस बेस पर तैनात होगा, जिसे अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है।
पिटुफिक स्पेस बेस पहले से ही अमेरिका की अंतरिक्ष और मिसाइल निगरानी से जुड़ी गतिविधियों का अहम केंद्र रहा है। यहां मिलिट्री एयरक्राफ्ट की तैनाती से आर्कटिक क्षेत्र में हवाई निगरानी और त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया की क्षमता बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम रूस और चीन की आर्कटिक में बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर उठाया गया है।
अमेरिका के इस फैसले के बाद डेनमार्क ने भी ग्रीनलैंड में अपने सैनिक भेजे हैं। डेनमार्क का कहना है कि यह तैनाती ग्रीनलैंड की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सहयोगी देशों के साथ समन्वय मजबूत करने के लिए की गई है। ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन स्वायत्त क्षेत्र है, ऐसे में वहां की सुरक्षा डेनमार्क की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ग्रीनलैंड में अमेरिका और डेनमार्क की बढ़ती सैन्य मौजूदगी आर्कटिक को एक नए रणनीतिक संघर्ष क्षेत्र के रूप में उभार रही है। प्राकृतिक संसाधनों, नई समुद्री राहों और सुरक्षा हितों के कारण आने वाले समय में इस क्षेत्र में महाशक्तियों की सक्रियता और बढ़ सकती है।









