
उत्तर प्रदेश के मथुरा में प्रशासन की कार्रवाई से सैकड़ों परिवारों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। शहर के एक इलाके में करीब 300 घरों को अवैध निर्माण बताते हुए हटाने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन ने इन मकानों को खाली करने के लिए सिर्फ 7 दिन का नोटिस जारी किया है। खास बात यह है कि इनमें कई घर ऐसे हैं, जो लगभग 70–80 साल पुराने बताए जा रहे हैं, जहां पीढ़ियों से लोग रह रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके घर दशकों से यहां मौजूद हैं और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उन्हें अपने ही आशियाने से बेदखल होना पड़ेगा। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त समय और वैकल्पिक व्यवस्था दिए बिना नोटिस थमा दिया गया है। कई बुजुर्गों और बच्चों वाले परिवारों के लिए यह फैसला भावनात्मक और आर्थिक रूप से बेहद कठिन साबित हो रहा है।
प्रशासन का तर्क है कि यह कार्रवाई सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने और विकास परियोजनाओं के तहत की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, इलाके में अवैध निर्माण बढ़ने से कानून व्यवस्था और शहर के विकास में बाधा आ रही थी। इसलिए नियमानुसार कार्रवाई जरूरी थी। हालांकि, प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत लोगों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा।
यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय मुद्दा बन गया है। एक ओर सरकार विकास और कानून की बात कर रही है, तो दूसरी ओर सैकड़ों परिवार अपने वर्षों पुराने घर बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। आने वाले दिनों में मथुरा का यह मामला प्रदेश की राजनीति और समाज में बड़ी बहस का विषय बन सकता है।









