
भोपाल/आदित्य शंकर तिवारी: नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा आयोजित साप्ताहिक विभागीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बड़ी कार्रवाई की गई है। आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास, श्री संकेत भोंडवे ने शासकीय कार्यों, पेयजल योजनाओं, स्वच्छ जल अभियान और अमृत 2.0 योजना के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में तीन मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
इन अधिकारियों पर गिरी गाज
नगरीय विकास एवं आवास विभाग आयुक्त के द्वारा तीन अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई है, उनके विवरण और लापरवाही के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं।
विजयपुर नगर परिषद के प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी मनोज शर्मा की समीक्षा में पाया गया कि ‘स्वच्छ जल अभियान’ के क्रियान्वयन में अपेक्षित रुचि नहीं ली गई। इसके अतिरिक्त, सीएम हेल्पलाइन (181) पर दर्ज पेयजल संबंधी शिकायतों का समय-सीमा के भीतर निराकरण नहीं किया गया। जिससे लोगो को बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ा। यह शिकायतों के एल-4 (Level-4) स्तर तक पहुँचने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न करना वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना और कार्य में लापरवाही माना गया है।
दतिया जिले के भांडेर नगर परिषद् के हनुमंत भदौरिया को केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत ठेकेदार को निर्धारित समय के भीतर स्वीकृति पत्र (Letter of Acceptance – LOA) जारी न करने का दोषी पाया गया है। इस देरी के कारण महत्वपूर्ण पेयजल परियोजना के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब हुआ, जिसे शासकीय कार्यों के प्रति उदासीनता माना गया है।
बड़ौनी नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी यशवंत राठौर के विरुद्ध हितग्राही मूलक योजनाओं और स्वच्छ सर्वेक्षण 2026 के कार्यों में प्रगति न लाने तथा सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण में लापरवाही के आरोप हैं। साथ ही, 13 मई 2026 को आयोजित महत्वपूर्ण विभागीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने पर उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त की सख्त चेतावनी
नगरीय प्रशासन एवं विकास के आयुक्त संकेत भोंडवे ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आमजन को समय पर मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि सीएम हेल्पलाइन (181) की शिकायतों के निराकरण, शुद्ध पेयजल प्रदाय और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। कार्यों में उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध इसी तरह की कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
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