
उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक नई और गहरी दरार दिखाई दे रही है। सूबे की सत्ता पर काबिज योगी आदित्यनाथ सरकार पर अब ‘ब्राह्मण विरोधी‘ होने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। जिस वर्ग को भाजपा का सबसे मजबूत आधार स्तंभ माना जाता था, आज वही वर्ग सरकार की नीतियों और हालिया घटनाक्रमों को लेकर आक्रोशित है।
शंकराचार्य अनिवेशानंद पर आरोप: आस्था या सियासी साजिश?
हाल ही में शंकराचार्य अनिवेशानंद पर लगे आरोपों ने आग में घी डालने का काम किया है। ब्राह्मण समाज के प्रबुद्ध वर्गों और संतों का एक बड़ा धड़ा इसे ‘सोची–समझी सरकारी प्लानिंग‘ करार दे रहा है।
- षड्यंत्र की आहट: जानकारों का मानना है कि जो भी स्वतंत्र आवाज सत्ता के सामने चुनौती बनती है, उसे दबाने के लिए कानूनी दांव–पेंच का सहारा लिया जा रहा है।
- संत समाज में दरार: क्या योगी सरकार अपने ‘कट्टर हिंदुत्व‘ के ब्रांड में केवल एक ही वर्ग का वर्चस्व चाहती है? यह सवाल आज उत्तर प्रदेश के हर मंदिर और मठ में गूंज रहा है।
यूपी का जातीय गणित: क्या ब्राह्मण फिर पलटेगा बाजी?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मणों का वोट बैंक हमेशा से ‘किंगमेकर‘ रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो:
वर्ग | अनुमानित जनसंख्या प्रतिशत | प्रभाव क्षेत्र |
ब्राह्मण | 12% – 14% | लगभग 100-110 विधानसभा सीटें |
ठाकुर | 7% – 8% | सत्ता का वर्तमान केंद्र |
12% से 14% की यह आबादी अकेले दम पर चुनाव हराने या जिताने की क्षमता रखती है। पूर्वांचल से लेकर पश्चिम तक, ब्राह्मणों की नाराजगी भाजपा के लिए ‘मिशन 2027′ में बड़ा रोड़ा साबित हो सकती है।
योगी सरकार के लिए बढ़ती मुश्किलें
योगी आदित्यनाथ के लिए आने वाला समय कांटों भरा हो सकता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. अधिकारी तंत्र पर आरोप: आरोप है कि प्रशासन में एक विशेष जाति का बोलबाला बढ़ गया है, जिससे ब्राह्मण अधिकारी और कर्मचारी उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
2. एनकाउंटर और कार्रवाई: विकास दुबे कांड के बाद से ही एक नैरेटिव सेट हुआ है कि सरकार की कार्रवाई का रुख एकतरफा होता है।
3. विपक्ष की घेराबंदी: सपा और कांग्रेस इस असंतोष को भुनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। यदि ब्राह्मणों का एक छोटा हिस्सा भी छिटका, तो भाजपा का बहुमत का सपना टूट सकता है।
“सत्ता के अहंकार में अगर चाणक्य को अपमानित किया गया, तो इतिहास गवाह है कि नंद वंश का क्या हश्र हुआ था। आज का ब्राह्मण केवल मंदिर का पुजारी नहीं, बल्कि राजनीति का धुरी भी है।“ – ब्राह्मण चेतना मंच के एक प्रतिनिधि का बयान
उत्तर प्रदेश में ‘बाबा‘ का इकबाल बुलंद जरूर है, लेकिन ब्राह्मणों की यह नाराजगी अगर शांत नहीं हुई, तो अगले चुनाव में योगी सरकार के लिए राह आसान नहीं होगी। क्या योगी आदित्यनाथ इस डैमेज को कंट्रोल कर पाएंगे, या फिर ब्राह्मणों का यह गुस्सा लखनऊ की कुर्सी के पाए हिला देगा? यह देखना दिलचस्प होगा।







