
आओ-हवा सुधारने की जिम्मेदारी संभालने वाला विभाग एक बार फिर अंदरूनी खींचतान के चलते अखाड़ा बनने की राह पर है। इस बार मुकाबला विभाग के मुखिया ACS और उनके अधीन आने वाले संस्थान के अध्यक्ष के बीच छिड़ा है। दिलचस्प बात यह है कि अध्यक्ष जी खुद रिटायर्ड आईएएस हैं और अब सत्ताधारी दल से जुड़ चुके हैं। इसके बावजूद विभाग में उनकी राह आसान होती नजर नहीं आ रही है। बताया जाता है कि ACS साहब ने अध्यक्ष जी के खिलाफ कार्रवाई की कोशिश की, लेकिन अध्यक्ष जी भी पीछे नहीं हटे।
उन्होंने भी देर नहीं की और सरकार को एक लंबा-चौड़ा पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। पत्र में अध्यक्ष जी ने आरोप लगाया है कि उनका स्टाफ हटाकर उन्हें काम करने से रोकने की कोशिश की जा रही है। उनका यह भी कहना है कि स्टाफ में बदलाव के चलते कामकाज प्रभावित हो रहा है और फाइलें लंबित होती जा रही हैं। लेकिन अध्यक्ष जी की शिकायत पर अब तक कोई ठोस सुनवाई नहीं होने से उनकी नाराजगी और बढ़ गई है। इस विवाद ने विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के बीच तालमेल को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
अब सवाल यह है कि जिस विभाग की जिम्मेदारी आओ-हवा सुधारने की है, वहां अफसरों के बीच बिगड़े रिश्तों को कौन सुधारेगा? अध्यक्ष जी अपनी बात सरकार तक पहुंचा चुके हैं, लेकिन मौजूदा हालात में दोनों पक्षों के बीच तनाव कम होने के बजाय बढ़ता दिख रहा है। विभाग में प्रबंधन सुधारने से पहले कुर्सियों के बीच बढ़ता टकराव कम करना जरूरी हो गया है।
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