आद्य शंकराचार्य जयंती श्रद्धा के साथ मनाई गई, खंडवा में हुए धार्मिक आयोजन

खंडवा।  वैशाख शुक्ल पंचमी के अवसर पर आद्य शंकराचार्य जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। इस अवसर पर देशभर में धार्मिक आयोजन हुए, वहीं मध्यप्रदेश के खंडवा स्थित श्री अखाड़े वाले हनुमान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। भगवान् आद्य शंकराचार्य का अवतार ऐसे समय पर हुआ जब भारत वर्ष में वैदिक सनातनीय परम्परा का पालन करने वालो पर वज्रपात होने लगा था और अनाधिकारी वैदिक धर्म का उपदेश करने लगे थे। सारा धर्मप्राणराष्ट्र अनीश्वरवाद में दीक्षित हो गया था। जब सनातनधर्म अज्ञान-अंधकार की गुफाओं में समाहित होने लगा था। उस समय भारतीय सनातन वैदिक धर्म, हिंदू धर्म की रक्षा करने के लिए आद्य शंकराचार्य का अवतार हुआ। जिन वेद-शास्त्रों ने जीवों के कल्याण के लिए यज्ञ-यागादि का विधान कर कर्मबंधन से मुक्त होने का उपाय बताया एवं ज्ञानियों के लिए परमसिंधुसुधारूप परब्रह्म में समा जाने का उपदेश प्रदान किया। जब इस वैदिक परंपरा को नष्ट-भ्रष्ट करने का प्रयास किया जाने लगा, तब श्रीमद् आद्य शंकराचार्य का अवतार हुआ।

धर्म रक्षा के प्रतीक माने जाते हैं शंकराचार्य

जहां धर्म और ब्रह्म के संबंध में वेद एकमात्र प्रमाण माने जाते थे, वहीं कुछ स्वतंत्र आगमों का भी प्रणयन होने लगा। आधुनिकों के बाहुल्य से वेद विरोधी मतों का प्रचलन बढ़ा तो तीर्थयात्राएं बंद होने लगी और भारत की एकता अखंडता खतरे में पड़ गई। ऐसे में देवताओं की सभा हुई और सभी देवों ने महादेव से अनुरोध करते हुए कहा – हे देवाधिदेव !  हे प्रभु! धर्म की स्थापना के लिए आपका सक्रिय होना परम आवश्यक हो गया है। देवाधिदेव महादेव ने प्रार्थना स्वीकार की और केरल-कालटी में अवतार लेकर सनातन हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए चतुष्पीठ की स्थापना की। उन्होने  भारतभूमि भ्रमण करते हुए केदारनाथ से कैलाश गमन किया।

मंदिर में हुए विशेष धार्मिक अनुष्ठान

जयंती के अवसर पर मंदिर में शंकराचार्य परंपरा से जुड़े शिष्यों द्वारा पादुका पूजन, अभिषेक, सहस्त्रार्चन और आरती की गई। इसके बाद आद्य शंकराचार्य द्वारा रचित स्तोत्रों का पाठ किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

श्रद्धालुओं में उत्साह

जयंती के अवसर पर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया और शंकराचार्य के विचारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

इस प्रकार आद्य शंकराचार्य जयंती पर धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करते हुए श्रद्धालुओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

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Manisha Gupta

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