
नमस्कार, ‘ब्रांडवाणी‘ की इस विशेष खोजी रिपोर्ट में आपका स्वागत है। साल 2020 और 2021 का वह खौफनाक मंजर आपको याद होगा। कोरोना नाम की वैश्विक महामारी से जब आम जनता अस्पतालों में एक बेड और ऑक्सीजन के लिए दर-दर भटक रही थी, तब क्या कुछ रसूखदार लोग आपदा में अपने लिए मुनाफे का अवसर तलाश रहे थे? आज हम एक ऐसे ही ‘अवसर‘ का पर्दाफाश करने जा रहे हैं। मध्य प्रदेश के भोपाल में एक आलीशान अस्पताल बनकर तैयार है, लेकिन इस अस्पताल की बुनियाद में स्वास्थ्य विभाग के पूर्व अपर मुख्य सचिव (ACS) मोहम्मद सुलेमान और कोरोना काल के आपूर्तिकर्ताओं के बीच के कथित कारोबारी गठजोड़ की गंध आ रही है। क्या महामारी के दौरान बांटे गए सरकारी ठेकों का कर्ज आज निजी अस्पताल में हिस्सेदारी के रूप में चुकाया जा रहा है? आइए देखते हैं ब्रांडवाणी की यह विशेष रिपोर्ट।
राजधानी भोपाल की कोलार तहसील का पॉश इलाका, बावड़िया कलां। यहां का खसरा क्रमांक 9/2/8 (स) कोई साधारण जमीन नहीं है। ब्रांडवाणी की खोजी रिपोर्ट ने सरकारी भू-अभिलेखों के हवाले से यह सनसनीखेज दावा किया है कि 0.1010 हेक्टेयर, यानी करीब 10,871 वर्गफुट का यह पूरा भूखंड मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के पूर्व ACS मोहम्मद सुलेमान और उनकी पत्नी सीमा सुलेमान के नाम पर दर्ज है। इस भूखंड के ठीक बगल में खसरा क्रमांक 9/2/9 (स) है, जिस पर अन्य लोगों के नाम दर्ज हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में इस जमीन का मूल उपयोग ‘आवासीय‘ यानी सिर्फ घर बनाने के लिए दर्ज था। लेकिन सत्ता और रसूख का पहिया घूमा, और साल 2023 में तहसीलदार न्यायालय के एक आदेश के बाद राजस्व रिकॉर्ड में बड़ा बदलाव कर दिया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि मार्च 2025 में इस भूमि के डायवर्सन (व्यावसायिक उपयोग) से संबंधित राशि भी जमा कर दी गई। दोनों भूखंडों की प्रशासनिक प्रक्रिया बिल्कुल एक ही समय में, एक ही रफ्तार से आगे बढ़ी। और आज, उस आवासीय जमीन पर करोड़ों की लागत से एक व्यावसायिक अस्पताल की इमारत खड़ी है।
कागजों से निकलकर जब ब्रांडवाणी की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो हकीकत कैमरे में कैद हो गई। वीडियो में आप साफ देख सकते हैं कि पूर्व ACS परिवार से जुड़ी इस जमीन पर ‘आनंदम अस्पताल‘ पूरी तरह से संचालित हो रहा है। अस्पताल के प्रवेश द्वार पर खड़ी ‘एडवांस लाइफ सपोर्ट‘ एंबुलेंस और भव्य रिसेप्शन इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यह कोई छोटा-मोटा क्लिनिक नहीं, बल्कि एक भारी-भरकम निवेश वाली परियोजना है।
हमारा रिपोर्टर जब इस अस्पताल के भीतर दाखिल होता है, तो वहां मरीजों के लिए व्हीलचेयर और रिसेप्शन पर अस्पताल का स्टाफ मौजूद दिखता है। जांच-पड़ताल के दौरान रिपोर्टर वहां मौजूद कर्मचारियों से प्रबंधन से जुड़े ‘बंसल सर‘ से मिलने की बात कहता है। रिसेप्शन से रिपोर्टर को पीछे के सर्विस गेट की तरफ भेज दिया जाता है। सर्विस गेट पर बैठे सुरक्षाकर्मी से जब रिपोर्टर दोबारा ‘बंसल सर‘ के बारे में पूछताछ करता है, तो उसे कोई स्पष्ट और सीधा जवाब नहीं मिलता। प्रबंधन से जुड़े इन चेहरों को आखिर क्यों छिपाया जा रहा है? क्या इस अस्पताल के पीछे के साझीदार वही लोग हैं, जिन पर अब हितों के टकराव के गंभीर आरोप लग रहे हैं?
इस पूरे मामले का सबसे स्याह पहलू कोरोना महामारी से जुड़ा है। जिस वक्त मोहम्मद सुलेमान मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव के पद पर काबिज थे, उस वक्त आपातकालीन स्थितियों का हवाला देकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर खरीद की गई थी।
ब्रांडवाणी की रिपोर्ट एक बेहद गंभीर सवाल उठाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना महामारी के दौरान जिन चुनिंदा निजी कंपनियों और आपूर्तिकर्ताओं को सीटी स्कैन मशीन, लैब टेस्टिंग, दवाओं और मेडिकल लॉजिस्टिक्स से जुड़े करोड़ों रुपये के काम सौंपे गए थे, आज वही कारोबारी पूर्व अधिकारी से जुड़े इस निजी अस्पताल प्रोजेक्ट में साझीदार बन बैठे हैं।
क्या यह महज़ एक संयोग है? या फिर सत्ता में रहते हुए अपनों को फायदा पहुंचाने और रिटायरमेंट के बाद उसी फायदे को अपने निजी व्यवसाय में तब्दील करने की एक सोची-समझी साजिश? रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि यदि किसी अधिकारी के अधीन काम करने वाले और ठेके पाने वाले सरकारी आपूर्तिकर्ता, बाद में उसी अधिकारी या उनके परिवार की निजी संपत्ति पर कारोबारी साझीदार बनते हैं, तो क्या यह सीधे तौर पर ‘हितों के टकराव‘ का आपराधिक मामला नहीं है?
यद्यपि, कानून की नजर में सिर्फ सरकारी ठेका मिलना या किसी पूर्व अधिकारी के साथ कारोबारी संबंध होना स्वतः भ्रष्टाचार साबित नहीं करता। किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित निर्माण की अनुमति, कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड, साझेदारी के दस्तावेज (Partnership Deeds), ठेकों की बोली प्रक्रिया और अस्पताल में हुए निवेश की वास्तविक संरचना की स्वतंत्र जांच बेहद जरूरी है।
मैं इस वक्त भोपाल के उसी ‘आनंदम अस्पताल‘ के बाहर मौजूद हूं, जो पूर्व ACS मोहम्मद सुलेमान की जमीन पर खड़ा है। ब्रांडवाणी की इस रिपोर्ट ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब मध्य प्रदेश सरकार को देना ही होगा। अगर जमीन आवासीय थी, तो उस पर इतने बड़े व्यावसायिक निर्माण की अनुमतियां किस दबाव में दी गईं? कोरोना काल में जिन सप्लायर्स ने सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये कमाए, क्या वही पैसा अब इस निजी अस्पताल की ईंटों में लगाया जा रहा है? ये सवाल सिर्फ एक जमीन या अस्पताल के नहीं हैं, बल्कि यह सवाल उस सिस्टम के भ्रष्टाचार के हैं, जो महामारी के वक्त भी मुनाफे का गणित बिठाने में लगा था।”
ब्रांडवाणी की रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश लोकायुक्त, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और अन्य सक्षम जांच एजेंसियों से इस पूरे सिंडिकेट की तत्काल जांच की मांग की है।
जांच मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर होनी चाहिए:
1. अस्पताल परियोजना में लग रही करोड़ों की पूंजी का वास्तविक स्रोत क्या है?
2. आवासीय जमीन के उपयोग में बदलाव और निर्माण अनुमतियों में किन प्रशासनिक नियमों को ताक पर रखा गया?
3. कोरोना काल में मोहम्मद सुलेमान के कार्यकाल में हुए सरकारी अनुबंधों (Contracts) और वर्तमान अस्पताल के निवेशकों के बीच क्या कोई सीधा वित्तीय संबंध है?
जब तक संबंधित सरकारी विभाग, स्थानीय निकाय और परियोजना से जुड़े निवेशक इन सवालों के आधिकारिक जवाब और दस्तावेज सार्वजनिक नहीं करते, तब तक संशय के बादल गहराते रहेंगे।
ब्रांडवाणी की इस विशेष रिपोर्ट ने दस्तावेजों के आधार पर जो तथ्य सामने रखे हैं, उन्होंने मध्य प्रदेश के नौकरशाही तंत्र की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। हालांकि, इन सवालों को अंतिम निष्कर्ष मानने से पहले स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन धुआं वहीं उठता है जहां आग लगी हो। महामारी के उस दौर में जब जनता अपनी सांसों के लिए संघर्ष कर रही थी, तब क्या वाकई सिस्टम के भीतर कुछ लोग अपने भविष्य के ‘आनंदम‘ की नींव रख रहे थे?
क्या मध्य प्रदेश सरकार और उसकी जांच एजेंसियां एक पूर्व रसूखदार अधिकारी के खिलाफ जांच का साहस जुटा पाएंगी? या फिर एक बार फिर फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? इन सभी सवालों के जवाब वक्त देगा। हम इस खबर की तह तक जाएंगे और हर अपडेट आप तक पहुंचाते रहेंगे। देखते रहिए ब्रांडवाणी समाचार—‘ना डर, ना दबाव, सिर्फ सच‘।
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