
बुरहानपुर/मथुरा: कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद का विवाद फिर उभरकर सामने आया। लगभग 13.37 एकड़ भूमि में से ढाई एकड़ हिस्से को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है। मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली माना जाता है। ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार इस स्थान पर भव्य मंदिर थे, जिन्हें अलग-अलग कालखंड में आक्रमणों के दौरान नुकसान पहुंचा।
कुछ विवरणों में महमूद गजनवी के हमले का जिक्र मिलता है, वहीं मुगल काल में भी मंदिरों को लेकर घटनाएं सामने आई। इतिहासकार ऑड्रे ट्रस्के ने भी अपने अध्ययन में इन घटनाओं का उल्लेख किया। ब्रिटिश शासन से लेकर आज तक इस भूमि को लेकर कई कानूनी विवाद उठते रहे। 1951 में श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट का गठन हुआ और मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया।
इसके बाद 1968 में मंदिर ट्रस्ट और ईदगाह कमेटी के बीच समझौता हुआ, जिसके तहत विवादित हिस्से के उपयोग की रूपरेखा तय हुई। हालांकि यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और सभी पक्ष अपनी दलीलें प्रस्तुत कर रहे हैं। इसी बीच आचार्य राजेश्वर जी ने मीडिया से बातचीत में सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि गली से लेकर दिल्ली तक सरकार होने के बावजूद संत समाज के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाई जा रही। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय पर न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन और कर सेवा जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
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