बड़ी कुर्सी के लिए बड़े-बड़ों की जुगाड़! नौकरशाही के गलियारों में मची हलचल

प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कुर्सी को लेकर इन दिनों सत्ता और नौकरशाही के गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। मंत्रालय के भीतर से लेकर दिल्ली तक यह सवाल गूंज रहा है कि प्रदेश के शीर्ष प्रशासनिक पद पर आखिर किस अधिकारी की ताजपोशी होगी। इस पद को लेकर कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं और बताया जा रहा है कि दावेदार अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि भविष्य की प्रशासनिक दिशा तय करने वाला फैसला माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, 1990 और 1993 बैच के कई वरिष्ठ अधिकारी इस दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं। कुछ अधिकारियों का अनुभव और कार्यकाल उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है, जबकि कुछ को राजनीतिक और प्रशासनिक समीकरणों का लाभ मिलने की चर्चा है। यही वजह है कि मंत्रालय के भीतर लगातार बैठकों, चर्चाओं और अनौपचारिक संपर्कों का दौर जारी है। जानकारों का मानना है कि शीर्ष पद की इस प्रतिस्पर्धा में केवल वरिष्ठता ही नहीं, बल्कि सरकार का भरोसा और प्रशासनिक प्रदर्शन भी अहम भूमिका निभाएगा।

दिलचस्प बात यह है कि कई दावेदार ऐसे भी हैं जो सार्वजनिक रूप से इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे, लेकिन पर्दे के पीछे उनकी सक्रियता को लेकर चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासनिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि कुछ अधिकारी अपने पुराने कार्यकाल और उपलब्धियों को आधार बनाकर अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हैं, जबकि अन्य अधिकारी वर्तमान शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप अपनी छवि प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे यह मुकाबला और अधिक रोचक होता जा रहा है।

फिलहाल अंतिम निर्णय सरकार और उच्च स्तर पर होने वाली चर्चाओं पर निर्भर माना जा रहा है। हालांकि नियुक्ति को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में उत्सुकता चरम पर है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण नौकरशाही कुर्सी पर किस अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और कौन इस प्रतिष्ठित पद तक पहुंचने में सफल होगा। तब तक मंत्रालय से लेकर राजनीतिक गलियारों तक केवल एक ही चर्चा जारी है—आखिर बड़ी कुर्सी किसे मिलेगी?

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gaurav singh rajput

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