
जबलपुर, 6 अक्टूबर 2026। बागेश्वर धाम से जुड़े नाबालिग से कथित दुष्कर्म मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने छतरपुर पुलिस अधीक्षक को दो महीने के भीतर जांच पूरी करने को कहा है। यह आदेश आरोपी राजू जाटव की दूसरी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। मामले में नाबालिग के शुरुआती बयानों और बाद में अदालत में दिए बयान में अंतर सामने आया है। वहीं, फोरेंसिक जांच में आरोपी को भ्रूण का जैविक पिता नहीं पाया गया।
शुरुआती बयान में लगाया था दुष्कर्म का आरोप
अभियोजन के मुताबिक, नाबालिग 15 मार्च को घर से निकलकर बागेश्वर धाम पहुंची थी। दो दिन बाद उसकी मुलाकात आरोपी राजू जाटव से हुई। पुलिस के अनुसार, नाबालिग ने शुरुआती जांच के दौरान आरोपी पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था।
मामले की जांच के दौरान नाबालिग के गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। चिकित्सकीय प्रक्रिया के बाद भ्रूण और प्लेसेंटा को फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा गया था। पुलिस और मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज शुरुआती बयानों में नाबालिग ने आरोपी पर यौन अपराध का आरोप लगाया था।
अभियोजन की कहानी के मुताबिक, आरोपी ने नाबालिग को कुछ समय अपने साथ रखा और बाद में उसे ट्रेन से पचोर ले गया। इसके बाद आरोपी की पत्नी की मदद से पुलिस ने नाबालिग को बरामद किया था। मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया गया और उसने बाद में हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की।
यह भी पढ़े: लाड़ली बहना योजना पर सीएम मोहन यादव का मजाकिया जवाब, बोले- बहुत महंगी पड़ गई
DNA रिपोर्ट में आरोपी नहीं निकला भ्रूण का जैविक पिता
मामले में जांच की दिशा उस समय बदल गई, जब फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार आरोपी राजू जाटव का DNA भ्रूण के DNA से मेल नहीं खाया। यानी फोरेंसिक रिपोर्ट ने आरोपी को भ्रूण का जैविक पिता स्थापित नहीं किया।
इसके बाद सुनवाई के दौरान नाबालिग ने अपने पहले के आरोपों का समर्थन नहीं किया। हाईकोर्ट ने उसके शुरुआती बयानों और बाद में अदालत में दिए बयान के बीच विरोधाभास को गंभीरता से लिया। अदालत के सामने यह सवाल भी आया कि नाबालिग के साथ यौन अपराध किस व्यक्ति ने किया और भ्रूण का जैविक पिता कौन है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने मामले की नए सिरे से जांच के लिए SIT गठित करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने टीम को पूरे घटनाक्रम की जांच कर वास्तविक तथ्यों का पता लगाने को कहा है।
दो महीने में जांच पूरी करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने छतरपुर एसपी को विशेष जांच दल गठित करने और जांच को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने आरोपी की दूसरी जमानत याचिका भी खारिज कर दी है। अब SIT मामले से जुड़े सभी पहलुओं की दोबारा जांच करेगी।
इस जांच में नाबालिग के अलग-अलग बयानों, फोरेंसिक रिपोर्ट और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों को ध्यान में रखा जाएगा। अदालत का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि नाबालिग के साथ कथित यौन अपराध की वास्तविक स्थिति क्या थी और भ्रूण का जैविक पिता कौन है।
मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण उसकी पहचान से संबंधित किसी भी जानकारी को सार्वजनिक करना कानून और गोपनीयता की दृष्टि से उचित नहीं है। फिलहाल SIT की जांच के बाद ही मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
- bageshwar-dham-case-hc-sit-probe








