बीजिंग: निर्वासित तिब्बती संसद का 17वां कार्यकाल समाप्त: बजट पारित, राष्ट्रीय प्रतीकों के लिए नए नियम

ब्रांडवाणी/बीजिंग: हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में संचालित निर्वासित तिब्बती संसद का 17वें कार्यकाल का अंतिम सत्र सोमवार को समाप्त हो गया। करीब दो सप्ताह तक चले इस सत्र में कई अहम फैसले लिए गए, जिनमें आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए बजट पारित करना और तिब्बती राष्ट्रीय प्रतीकों के उपयोग को लेकर नए नियम तय करना शामिल है।

सत्र के दौरान निर्वासित तिब्बती प्रशासन के कामकाज के लिए लगभग 3475 मिलियन रुपये का वार्षिक बजट मंजूर किया गया। यह बजट शिक्षा, सामाजिक कार्यक्रमों, प्रशासनिक गतिविधियों और दुनिया भर में बसे तिब्बती समुदाय से जुड़े कार्यों पर खर्च किया जाएगा।इसके अलावा संसद ने तिब्बती राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीक और राष्ट्रगान के उपयोग को लेकर एक समान नियम लागू करने का फैसला किया। सदस्यों का कहना है कि ये प्रतीक तिब्बती पहचान और संस्कृति के प्रतीक हैं, इसलिए इनके उपयोग में एकरूपता और सम्मान बनाए रखना जरूरी है।

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सत्र के दौरान चीन द्वारा पारित तथाकथित “जातीय एकता कानून” के खिलाफ भी एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। निर्वासित तिब्बती नेताओं ने आरोप लगाया कि यह कानून तिब्बती भाषा, संस्कृति और पहचान को कमजोर करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में रहने वाले तिब्बती इस कानून को स्वीकार नहीं करेंगे।संसद के कई सदस्यों ने कहा कि इस सत्र में लिए गए फैसले तिब्बती समुदाय के लिए लंबे समय तक महत्वपूर्ण साबित होंगे। उनका मानना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम बनने से तिब्बती पहचान को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

निर्वासित तिब्बती प्रशासन पिछले कई दशकों से धर्मशाला में कार्यरत है और दुनिया भर में बसे तिब्बती समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दों पर काम करता रहा है। संसद के इस सत्र को 17वें कार्यकाल का अंतिम सत्र माना जा रहा है, जिसमें बजट के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा और मंजूरी दी गई।

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    Rashel Kachwah Rajput

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