
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल अब कचरे को संसाधन में बदलने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा रही है। नगर निगम भुट्टे के डंठल और अन्य कृषि अवशेषों से ग्रीन फ्यूल (बायोमास ब्रिकेट्स) तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य कृषि अपशिष्ट का बेहतर उपयोग, प्रदूषण में कमी और नगर निगम के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार करना है। यह परियोजना शहर में सर्कुलर इकोनॉमी और टिकाऊ कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भुट्टे के डंठल से बनेगा ईंधन
परियोजना के तहत भुट्टे के डंठल सहित अन्य जैविक और हरित अपशिष्ट को प्रोसेस कर बायोमास ब्रिकेट्स बनाए जाएंगे। इन ब्रिकेट्स का उपयोग उद्योगों और अन्य संस्थानों में पारंपरिक ईंधन के विकल्प के रूप में किया जा सकेगा। इससे खेतों में फसल अवशेष जलाने की समस्या कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
नगर निगम को मिलेगा आर्थिक लाभ
नगर निगम इस परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत आगे बढ़ा रहा है। इससे एक ओर शहर के हरित कचरे और कृषि अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन होगा, वहीं तैयार होने वाले ग्रीन फ्यूल की बिक्री से निगम को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा।
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की परियोजनाएं लैंडफिल पर दबाव कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मददगार साबित हो सकती हैं। भोपाल पहले से ही सूखे और हरित कचरे के प्रसंस्करण से जुड़े कई नवाचारों पर काम कर रहा है, जिनका उद्देश्य शहर को अधिक स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाना है।
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