
सार
आदि मिश्रा | भोपाल में फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने की मांग को लेकर अतिथि विद्वानों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। सैकड़ों अतिथि विद्वान उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के सामने धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारी मंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन देना चाहते हैं। अतिथि विद्वानों का कहना है कि लंबे समय से आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन फॉलन आउट प्रक्रिया को रोकने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
विस्तार
भोपाल में अतिथि विद्वानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने की मांग को लेकर सैकड़ों अतिथि विद्वान उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के सामने धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारी मंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगों को सीधे उनके सामने रखने की मांग कर रहे हैं।
अतिथि विद्वानों का कहना है कि वे लंबे समय से फॉलन आउट प्रक्रिया को रोकने और अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार से मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार और मंत्री स्तर से कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
अतिथि विद्वानों के अनुसार, उनकी मुख्य मांग है कि जब तक उनके नियमितीकरण और स्थायित्व को लेकर नीति तैयार कर लागू नहीं कर दी जाती, तब तक फॉलन आउट प्रक्रिया को रोका जाए। 14 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के करीब 4500 अतिथि विद्वानों की ओर से इस मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है और मंत्री से मुलाकात के लिए प्रतिनिधिमंडल ने समय मांगा था।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मंत्री से मुलाकात नहीं होने के बाद उन्होंने उनके बंगले के सामने ही धरना शुरू कर दिया। अतिथि विद्वानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मंत्री से मुलाकात नहीं होती और फॉलन आउट प्रक्रिया को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
अतिथि विद्वानों की मांगों को लेकर पहले भी सरकार के स्तर पर नीति बनाने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की बात सामने आती रही है। अब प्रदर्शन के बीच सरकार और उच्च शिक्षा विभाग के अगले कदम पर नजर है।
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