भोपाल सिविल अस्पताल मॉकड्रिल: आधी रात हाईरिस्क केस के नाम पर हुआ सीक्रेट टेस्ट, खुला बड़ा सच

भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्वास्थ्य व्यवस्था को परखने के लिए एक अनोखी पहल की गई। शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात सिविल अस्पताल बैरागढ़ में एक गोपनीय मॉकड्रिल आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य इमरजेंसी केस में अस्पताल के रिस्पॉन्स टाइम को जांचना था। इस मॉकड्रिल की खास बात यह रही कि अस्पताल के किसी भी स्टाफ को पहले से इसकी जानकारी नहीं थी, जिससे वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।

कैसे हुई आधी रात मॉकड्रिल की शुरुआत?

रात करीब 12 बजे सीएमएचओ कार्यालय की टीम अस्पताल पहुंची और ड्यूटी डॉक्टर को सूचना दी कि एक गंभीर हाईरिस्क गर्भवती महिला को लाया जा रहा है। ड्यूटी डॉक्टर को निर्देश दिया गया कि तुरंत ऑन-कॉल विशेषज्ञों को बुलाया जाए और किसी अन्य स्टाफ को इसकी जानकारी न दी जाए। डॉक्टर ने तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ को कॉल किया और ऑपरेशन थिएटर की तैयारी शुरू करवाई।

कितनी देर में हुई पूरी तैयारी?

मॉकड्रिल के दौरान अस्पताल स्टाफ की तत्परता साफ देखने को मिली। करीब 30 से 40 मिनट के भीतर सभी विशेषज्ञ डॉक्टर अस्पताल पहुंच गए और ऑपरेशन की पूरी तैयारी कर ली गई।ऑपरेशन थिएटर को सक्रिय किया गया, खून की उपलब्धता जांची गई और सी-सेक्शन की तैयारी पूरी की गई। जब सारी तैयारी पूरी हो गई, तब सीएमएचओ टीम ने खुलासा किया कि यह एक मॉकड्रिल थी।

मॉकड्रिल से क्या सामने आया?

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि इस अभ्यास का उद्देश्य यह देखना था कि गंभीर मरीज आने पर कितनी जल्दी इलाज शुरू किया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि ड्यूटी रोस्टर का सख्ती से पालन किया जाए, रिस्पॉन्स टाइम को और कम किया जाए और ऑन-कॉल डॉक्टरों के वैकल्पिक नंबर भी उपलब्ध रखे जाएं।

क्यों जरूरी हैं ऐसी मॉकड्रिल?

विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में इस तरह की मॉकड्रिल बेहद जरूरी होती हैं। यह न केवल सिस्टम की कमियों को उजागर करती हैं, बल्कि स्टाफ को भी सतर्क और तैयार रखती हैं। ऐसी पहल से मरीजों को समय पर इलाज मिल सकता है, जिससे गंभीर परिस्थितियों में जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है।

भोपाल में की गई यह मॉकड्रिल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि समय पर प्रतिक्रिया देना ही आपातकालीन चिकित्सा में सबसे अहम होता है।

यह भी पढ़े: राजगढ़ में CMHO रिश्वत लेते गिरफ्तार, लोकायुक्त टीम की बड़ी कार्रवाई

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Srota Swati Tripathy

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