
भोपाल/ आदि मिश्रा: मध्य प्रदेश के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से भोपाल में आज देशभर के प्रमुख केंद्रीय और शैक्षणिक संस्थानों का बड़ा कॉन्क्लेव आयोजित किया जा रहा है। कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में होने वाले इस राज्य स्तरीय सम्मेलन में देश के प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन के जरिए विशेषज्ञ संस्थानों को प्रदेश की विकास प्रक्रिया से जोड़ने और स्थानीय समस्याओं के तकनीकी एवं व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर रहेगा।
130 से ज्यादा संस्थानों की भागीदारी
कॉन्क्लेव में 130 से ज्यादा केंद्रीय और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इसमें देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ तकनीकी, चिकित्सा, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी हिस्सा ले रहे हैं।
IIT, IIM, AIIMS, ISRO और DRDO जैसे संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों की मौजूदगी सम्मेलन को खास बनाती है। इन संस्थानों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल मध्य प्रदेश की अलग-अलग विकास संबंधी चुनौतियों के समाधान तलाशने में किए जाने की योजना है।
‘वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस’ पर रहेगा फोकस
कॉन्क्लेव की सबसे अहम पहल ‘वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस’ बताई जा रही है। इसके तहत देश के प्रमुख संस्थान मध्य प्रदेश के विकास से जुड़ी किसी एक प्राथमिकता या समस्या के समाधान के लिए अपना योगदान देने का संकल्प लेंगे।
इस पहल का उद्देश्य संस्थानों की विशेषज्ञता को प्रदेश की जरूरतों से सीधे जोड़ना है, ताकि शोध, तकनीक और विशेषज्ञ ज्ञान का इस्तेमाल जमीनी स्तर पर किया जा सके।
प्रदेश की समस्याओं के समाधान पर मंथन
सम्मेलन में मध्य प्रदेश के सामने मौजूद विभिन्न विकास संबंधी चुनौतियों पर विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। कोशिश रहेगी कि समस्याओं की पहचान के साथ उनके लिए तकनीकी और व्यावहारिक समाधान भी तैयार किए जाएं।
शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, अनुसंधान, कृषि, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में विशेषज्ञ संस्थानों की भूमिका को लेकर भी संभावनाएं तलाशे जाने की उम्मीद है।
‘समृद्ध मध्यप्रदेश@2047’ के विजन को मजबूती
कॉन्क्लेव का एक प्रमुख उद्देश्य ‘समृद्ध मध्यप्रदेश@2047’ के विजन को मजबूत करना है। इसके तहत प्रदेश को दीर्घकालिक विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए संस्थागत सहयोग और विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार का प्रयास है कि देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के ज्ञान और तकनीकी क्षमता को मध्य प्रदेश की विकास योजनाओं के साथ जोड़ा जाए, जिससे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप योजनाएं तैयार की जा सकें।
विशेषज्ञता को जमीनी जरूरतों से जोड़ने की कोशिश
यह कॉन्क्लेव केवल संस्थानों के बीच संवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विशेषज्ञता को प्रदेश की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
अब देखना होगा कि ‘वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस’ के तहत संस्थानों द्वारा लिए गए संकल्प किस तरह जमीन पर उतरते हैं और मध्य प्रदेश की विकास यात्रा में उनका कितना प्रभाव दिखाई देता है।
ये भी पढ़े – मुख्यमंत्री मोहन यादव का खजुराहो एयरपोर्ट पर आत्मीय स्वागत
- bhopal-institution-conclave-iit-iim-aiims-isro-drdo-one-institute-one-promise








