
भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में महिला आरक्षण संशोधन बिल पास न होने के विरोध में राजनीतिक माहौल गरमा गया। बीजेपी ने ‘जन आक्रोश महिला पद यात्रा’ निकालकर विरोध दर्ज कराया। इस पद यात्रा में मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल समेत कई मंत्री, सांसद और महिला मोर्चा की पदाधिकारी मौजूद रहीं जिसमें बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता और नेता शामिल हुए।
पद यात्रा का रूट और माहौल कैसा रहा?
पद यात्रा एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से शुरू होकर लोक भवन होते हुए रोशनपुरा चौराहे तक पहुंची। पूरे रास्ते में नारेबाजी और बैनरों के जरिए महिलाओं के अधिकारों की आवाज उठाई गई। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने काले गुब्बारे उड़ाकर विरोध का प्रतीकात्मक संदेश दिया। प्रदेशभर से आई महिलाओं ने इसमें भाग लेकर इसे बड़े जनआंदोलन का रूप दिया। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने भी इस पद यात्रा का समर्थन किया।
सीएम मोहन यादव का बयान क्यों चर्चा में है?
इस सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती। कांग्रेस को अपने कर्मों की कीमत चुकानी होगी। इस पार्टी ने हमारी बहनों के अधिकारों को कमजोर करने का काम किया है। नारी शक्ति वंदन विधेयक जिस तरह सदन में पारित नहीं हो सका, वह यह दिखाता है कि महिलाओं को उनका हक देने की इच्छा नहीं थी। अब हमारी बहनें चुप नहीं रहेंगी। हम लोकतांत्रिक तरीके से, सड़क से लेकर संसद तक, महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि महिलाओं के अधिकारों से जुड़े इस बिल को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएगी और विशेष सत्र बुलाकर निंदा प्रस्ताव लाने पर विचार करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रहेगा।
अन्य नेताओं के बयान और आरोप
कार्यक्रम में कई नेताओं ने विपक्ष पर तीखे आरोप लगाए।
- प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि – कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर सवाल उठाएं कि महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ क्यों किया गया।
- कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह – ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं के साथ बार-बार धोखा किया है।
- वहीं महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे – ने इसे महिलाओं के सम्मान का मुद्दा बताया है।
- सांसद लता वानखेड़े, पंचायत राज्यमंत्री राधा सिंह, मंत्री प्रतिमा बागरी और अर्चना चिटनिस ने भी महिलाओं के अधिकारों को लेकर अपनी बात रखी।
महिला आरक्षण बिल क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
महिला आरक्षण संशोधन बिल का उद्देश्य महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देना है। इससे पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से नीति निर्माण में संतुलन और सामाजिक विकास को गति मिलती है।
भारत के गौरवशाली इतिहास में नारी शक्ति का योगदान सदैव प्रेरणादायक रहा है। इसी परंपरा को सशक्त करने के संकल्प के साथ आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार यह महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आई। दुर्भाग्यवश, विपक्ष आदरणीय मोदी जी के विरोध में इतना अंधा हो चुका है कि उसने माताओं-बहनों के अधिकारों पर ही प्रहार कर दिया।भाजपा की डबल इंजन सरकार ने सदैव बहनों को सशक्त करने और उन्हें समान अधिकार दिलाने के लिए ठोस निर्णय लिए हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और लाड़ली बहना योजना जैसी पहल से महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।
क्या यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा?
बीजेपी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यह विरोध केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा।आने वाले समय में इसे और व्यापक स्तर पर उठाया जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
भोपाल में निकली जन आक्रोश महिला पद यात्रा ने महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासत को तेज कर दिया है। यह मुद्दा अब केवल संसद तक सीमित नहीं, बल्कि सड़कों तक पहुंच चुका है।
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