भोपाल पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार का नया मामला: टीआई की तैनाती पर उठे सवाल

भोपाल: पुलिस विभाग में इन दिनों एक ऐसा मामला चर्चा में है, जिसने महकमे की आंतरिक खींचतान और कथित भ्रष्टाचार की परतों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है.  यह प्रकरण एक थाना प्रभारी (टीआई) से जुड़ा बताया जा रहा है, जिन्हें प्रदेश के चर्चित और “मलाईदार” माने जाने वाले थानों में से एक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन अचानक उन्हें वहां से हटाकर पुलिस मुख्यालय (PHQ) से संबद्ध कर दिया गया।

ब्रांडवाणी के सूत्रों के अनुसार इस अधिकारी ने उक्त थाने में पदस्थापना पाने के लिए काफी प्रयास किए थे और कथित तौर पर बड़ी रकम खर्च कर अपनी तैनाती सुनिश्चित कराई थी.  लंबे समय से यह थाना अवैध कमाई की चर्चाओं को लेकर सुर्खियों में रहा है और माना जा रहा था कि इसी कारण अधिकारी यहां पदस्थ हुए थे।

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मामला तब नया मोड़ ले गया जब एक सतर्क अधिवक्ता ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आवाज उठाई.  अधिवक्ता ने केवल वर्तमान पदस्थापना ही नहीं, बल्कि टीआई की भर्ती से लेकर अब तक के सेवा काल से जुड़ी शिकायतों का विस्तृत दस्तावेज तैयार कर पुलिस मुख्यालय तक पहुंचाया। शिकायतों में कथित भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और पुराने विवादों से जुड़े कई बिंदुओं का जिक्र बताया जा रहा है। अंदरूनी चर्चाओं के मुताबिक जब मामला गंभीर होता दिखाई दिया तो कुछ प्रभावशाली और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों ने भी टीआई के पक्ष में पैरवी करने की कोशिश की। हालांकि अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और शिकायतों की गंभीरता के सामने ये प्रयास ज्यादा प्रभावी नहीं हो पाए।

लगातार बढ़ते दबाव और सामने आई शिकायतों को देखते हुए पुलिस मुख्यालय को आखिरकार सख्त कदम उठाना पड़ा। जल्दबाजी में आदेश जारी कर अधिकारी को संबंधित थाने से हटाकर मुख्यालय से अटैच कर दिया गया। फिलहाल उन्हें वहीं तैनात किया गया है, जबकि आगे जांच की भी चर्चा चल रही है।प्रशासनिक गलियारों में इस कार्रवाई को सिस्टम में जवाबदेही की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। कई लोगों का मानना है कि यदि ठोस प्रमाण और तथ्यों के साथ शिकायत की जाए, तो व्यवस्था के भीतर बैठे प्रभावशाली लोगों पर भी कार्रवाई संभव है।

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    Rashel Kachwah Rajput

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