
भोपाल| मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के मामले में 21 दिन बाद पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने पांच सदस्यीय विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया है। मामले में मुख्य संदिग्ध केयरटेकर वरुण कुमार अब भी फरार है। उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया जा चुका है।
आईएएस एसोसिएशन की मांग के बाद बनी एसआईटी
राकेश अग्रवाल हत्याकांड को लेकर मध्य प्रदेश आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात कर निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की थी। एसोसिएशन ने हत्या के पीछे केवल लूट ही नहीं, बल्कि पुराने आर्थिक विवाद और अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच की मांग रखी थी। इसके बाद मामले की जांच को और प्रभावी बनाने के लिए एसआईटी गठित की गई।
एसआईटी की अध्यक्षता अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी उमेश तिवारी करेंगे। टीम में भोपाल क्राइम ब्रांच के अधिकारियों और रातीबड़ थाने के पुलिसकर्मी के साथ तकनीकी सेल के सदस्य को भी शामिल किया गया है। टीम अब तक हुई जांच की कड़ियों को जोड़ते हुए फरार संदिग्ध तक पहुंचने का प्रयास करेगी।
30 सितंबर को घर में मिला था राकेश अग्रवाल का शव
राकेश अग्रवाल का शव 30 सितंबर की सुबह भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र स्थित सूरज नगर के उनके आवास में मिला था। पुलिस के अनुसार, उनकी गला रेतकर हत्या की गई थी। उनकी पत्नी दूसरे कमरे में थीं और उनका दरवाजा बाहर से बंद था। बाद में दूसरे कर्मचारी की मदद से दरवाजा खोला गया, जिसके बाद घटना का पता चला।
जांच के दौरान पुलिस का ध्यान वरुण कुमार पर गया, जो घटना से कुछ दिन पहले ही राकेश अग्रवाल की देखभाल के लिए रखा गया था। वारदात के बाद से वह गायब है। पुलिस उसकी तलाश मध्य प्रदेश के साथ दूसरे राज्यों में भी कर रही है।
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पांच राज्यों में तलाश, 50 हजार रुपये का इनाम
पुलिस ने वरुण कुमार की तलाश के लिए कई टीमें लगाई हैं। जांच के दौरान भोपाल रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में उसके दिखाई देने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद संभावित रास्तों और ठिकानों पर निगरानी बढ़ाई गई। आगरा से वृंदावन तक कई स्थानों पर उसके पोस्टर भी लगाए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी के मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने के कारण उसकी लोकेशन ट्रेस करना चुनौती बना हुआ है। अब तक उसके रिश्तेदारों और परिचितों से भी पूछताछ की जा चुकी है। उसकी गिरफ्तारी के लिए 50 हजार रुपये का इनाम घोषित है।
लूट से लेकर पुराने आर्थिक विवाद तक जांच के दायरे में
शुरुआती जांच में घर से सामान और मोबाइल गायब होने की बात सामने आई थी। पुलिस ने हत्या के बाद घर में आग लगाने की संभावित कोशिश के पहलू की भी जांच की है। वहीं, मामले में पुराने आर्थिक विवाद से जुड़े एक पहलू की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि, हत्या के पीछे वास्तविक वजह क्या थी, इसका अंतिम खुलासा संदिग्ध की गिरफ्तारी और आगे की जांच के बाद ही हो सकेगा।
राकेश अग्रवाल 1982 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी थे। उन्होंने जिला कलेक्टर समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया था और भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी के महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
राकेश अग्रवाल हत्याकांड में एसआईटी बनने के बाद जांच को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि 30 सितंबर की घटना के बाद से फरार वरुण कुमार कहां है और हत्या के पीछे वास्तविक वजह क्या थी। एसआईटी के सामने आरोपी की गिरफ्तारी के साथ-साथ वारदात की पूरी कड़ी सामने लाने की चुनौती है।
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