
भोपाल में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में राजधानी में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 2,801 मामले दर्ज किए गए। पिछले साल इसी अवधि में 2,216 मामले सामने आए थे। इस तरह एक साल में 585 मामलों की बढ़ोतरी हुई है। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक कुल मामलों में करीब 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
अपहरण और दुष्कर्म के मामलों में भी बढ़ोतरी
पुलिस आंकड़ों के अनुसार महिलाओं से जुड़े अलग-अलग अपराधों में वृद्धि दर्ज की गई है। अपहरण के मामले 2025 में 337 थे, जो 2026 में बढ़कर 505 हो गए। वहीं दुष्कर्म के मामले 276 से बढ़कर 301 दर्ज हुए। इनमें करीब 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताई गई है। इस साल सामूहिक दुष्कर्म का एक मामला भी दर्ज हुआ, जबकि पिछले साल ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था।
हत्या के मामलों में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 में महिलाओं की हत्या से जुड़े 8 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2026 में यह संख्या बढ़कर 10 हो गई।
आपराधिक धमकी और क्रूरता के मामले सबसे ज्यादा
आंकड़ों में आपराधिक धमकी के मामले सबसे अधिक दिखाई देते हैं। इस साल ऐसे 796 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल की तुलना में करीब 38 प्रतिशत अधिक हैं। इसी तरह भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 के तहत क्रूरता से जुड़े मामले 437 से बढ़कर 573 हो गए।
हालांकि सभी श्रेणियों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। साधारण चोट के मामले 78 से घटकर 42 रह गए। दहेज हत्या के मामलों में भी कमी दर्ज हुई और संख्या 8 से घटकर 6 हो गई। ये आंकड़े दर्ज मामलों से जुड़े हैं और इन्हें अपराधों की वास्तविक घटनाओं की कुल संख्या के समान नहीं माना जा सकता।
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पुलिस ने कहा- जांच और जागरूकता पर जोर
भोपाल पुलिस आयुक्त संजय कुमार के अनुसार महिलाओं के खिलाफ हिंसा से जुड़े मामलों की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है। जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया पर भी जोर दिया जा रहा है। पुलिस की ओर से महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान चलाने की बात कही गई है।
पुलिसकर्मियों को महिलाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा लड़कियों के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
बढ़ते आंकड़े महिला सुरक्षा पर खड़े करते हैं सवाल
भोपाल में महिलाओं के खिलाफ दर्ज मामलों में हुई बढ़ोतरी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। एक तरफ पुलिस कार्रवाई और जागरूकता अभियान चलाने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर दर्ज मामलों में वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है।
महिला सुरक्षा के लिए केवल घटना के बाद कार्रवाई ही नहीं, बल्कि रोकथाम, त्वरित शिकायत व्यवस्था, सुरक्षित सार्वजनिक स्थान और प्रभावी पुलिस निगरानी भी जरूरी है।
भोपाल में 2026 के शुरुआती नौ महीनों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 2,801 मामले दर्ज होना गंभीर संकेत है। पुलिस के अनुसार मामलों की जांच और जागरूकता अभियान जारी हैं। अब चुनौती यह है कि दर्ज मामलों में कमी लाने के साथ महिलाओं के लिए शहर में सुरक्षित माहौल भी सुनिश्चित किया जाए।
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