बीना/ मनीष कुमार चौबे: खरीफ फसलों की कटाई के साथ ही किसान रबी सीजन की तैयारियों में जुट गए हैं। बुधवार सुबह बिहरना स्थित स्टेट वेयरहाउस पर डीएपी खाद लेने के लिए किसानों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह करीब 6 बजे से ही किसान लंबी कतारों में खड़े नजर आए। पिछले साल डीएपी की कमी का सामना कर चुके किसान इस बार पहले से ही खाद का इंतजाम करने में जुट गए हैं, ताकि बुवाई के समय खाद के लिए भटकना न पड़े।
58 हजार हेक्टेयर में प्रस्तावित है रबी की बोनी
बीना क्षेत्र में इस वर्ष करीब 58 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बोनी प्रस्तावित है। इसमें लगभग 25 से 26 हजार हेक्टेयर में चना बोया जाता है। इसके अलावा मसूर, गेहूं सहित अन्य रबी फसलों का रकबा भी काफी बड़ा है।
चना और मसूर जैसी फसलों में डीएपी की महत्वपूर्ण भूमिका होने के कारण किसानों के बीच इसकी मांग अभी से बढ़ने लगी है। यही वजह है कि सीमित स्टॉक की जानकारी मिलते ही किसान सुबह-सुबह वेयरहाउस पहुंचकर कतार में लग गए।
4200 टन की जरूरत, अभी पहुंची सिर्फ 120 टन डीएपी
कृषि विभाग के अनुसार बीना क्षेत्र में रबी सीजन के लिए करीब 4200 मैट्रिक टन डीएपी की आवश्यकता है। विभाग ने निर्धारित मांग शासन को भेज दी है, लेकिन फिलहाल स्टेट वेयरहाउस में केवल 120 मैट्रिक टन डीएपी पहुंची है।
आवश्यकता और उपलब्ध स्टॉक के बीच बड़ा अंतर होने के कारण किसानों में चिंता बढ़ गई है। सीमित मात्रा में खाद उपलब्ध होने के चलते किसान पहले ही अपना हिस्सा सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी वजह से वेयरहाउस पर सुबह से ही लंबी कतारें लग गईं।
प्रति हेक्टेयर दो बोरी डीएपी देने का प्रावधान
कृषि विभाग की ओर से किसानों को प्रति हेक्टेयर दो बोरी डीएपी उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। उपलब्ध स्टॉक के अनुसार निर्धारित मात्रा में किसानों को खाद दी जा रही है, ताकि सीमित मात्रा में उपलब्ध उर्वरक का अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिल सके।
हालांकि मांग के मुकाबले स्टॉक कम होने के कारण आने वाले दिनों में आपूर्ति बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है।
किसान कर रहे एडवांस लिफ्टिंग
वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी अवधेश राय ने बताया कि किसान इस बार रबी सीजन के लिए एडवांस लिफ्टिंग कर रहे हैं। उनके अनुसार चना और मसूर की बुवाई के अलावा वर्तमान में खेतों में लगी मक्का और धान की फसलों में भी डीएपी की आवश्यकता होती है।
इसी वजह से किसान बुवाई का समय आने से पहले ही खाद खरीदकर रखना चाहते हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
पिछले साल की कमी ने बढ़ाई किसानों की चिंता
पिछले वर्ष डीएपी की आपूर्ति को लेकर किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। कृषि विभाग ने उस समय करीब 2500 से 3000 मैट्रिक टन डीएपी की मांग भेजी थी, लेकिन किसानों को लगभग 1500 मैट्रिक टन ही खाद उपलब्ध हो सकी थी।
आपूर्ति कम रहने के कारण कई किसानों को समय पर डीएपी नहीं मिल पाई थी। कई स्थानों पर खाद की कमी को लेकर किसानों में नाराजगी और विरोध की स्थिति भी बनी थी। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार किसान पहले से ही खाद का इंतजाम करने में जुट गए हैं।
अधिकारियों ने दूसरे फास्फेटयुक्त उर्वरकों के इस्तेमाल की दी सलाह
वेयरहाउस पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से संयम बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि डीएपी के अलावा अन्य फास्फेटयुक्त उर्वरक भी उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग फसल और मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार वैज्ञानिक सलाह लेकर किया जा सकता है।
हालांकि किसानों की पहली पसंद फिलहाल डीएपी ही बनी हुई है। यही कारण है कि सीमित मात्रा में इसकी आवक के बीच वेयरहाउस पर लगातार भीड़ बनी हुई है।
रबी सीजन में बढ़ सकती है खाद की मांग
बीना क्षेत्र में चना और मसूर की बड़े पैमाने पर खेती होने के कारण आने वाले दिनों में डीएपी की मांग और बढ़ने की संभावना है। जैसे-जैसे रबी की बुवाई का समय नजदीक आएगा, खाद की जरूरत भी बढ़ेगी।
किसानों की चिंता इस बात को लेकर है कि यदि समय रहते पर्याप्त मात्रा में डीएपी की आपूर्ति नहीं हुई तो उन्हें बुवाई के समय परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कृषि विभाग के सामने मांग के अनुरूप खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती रहेगी।
फिलहाल बिहरना स्थित स्टेट वेयरहाउस पर किसानों की कतारें इस बात का संकेत हैं कि पिछले साल की खाद किल्लत का असर इस बार भी किसानों की तैयारी पर साफ दिखाई दे रहा है। अब किसानों को इंतजार है कि शासन से मांग के अनुरूप डीएपी की खेप कब तक पहुंचती है।
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