अजनार नदी किनारे बिट्टू तबाही ने रखे दो कूड़ेदान, लौटे तो एक गायब; फिर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की अजनार नदी को साफ करने वाले सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर चर्चा में हैं। नदी की सफाई के बाद उन्होंने किनारे पर लोगों की सुविधा के लिए दो कूड़ेदान रखे थे। उनका उद्देश्य था कि लोग नदी में कचरा फेंकने के बजाय उसे कूड़ेदान में डालें। लेकिन जब वह दोबारा वहां पहुंचे तो एक कूड़ेदान गायब मिला।

नदी को दोबारा गंदा होने से रोकने की थी कोशिश

बिट्टू तबाही ने अजनार नदी की सफाई के लिए कई महीनों तक अभियान चलाया था। उन्होंने नदी और उसके आसपास से बड़ी मात्रा में प्लास्टिक और अन्य कचरा हटाया। सफाई के कुछ समय बाद नदी किनारे फिर से कचरा जमा होने लगा, जिसके बाद उन्होंने दोबारा सफाई शुरू की।

इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने नदी किनारे दो कूड़ेदान रखे थे। उनका कहना था कि ये कूड़ेदान उनके निजी इस्तेमाल के लिए नहीं थे, बल्कि लोगों को कचरा डालने की सुविधा देने के लिए लगाए गए थे। उनका मकसद नदी को दोबारा प्रदूषित होने से रोकना था।

लौटे तो एक कूड़ेदान गायब मिला

बिट्टू ने जब दोबारा नदी किनारे जाकर देखा तो वहां रखे दो कूड़ेदानों में से एक गायब था। घटना से उन्हें निराशा हुई। उन्होंने इस बारे में वीडियो के माध्यम से अपनी बात साझा की और बताया कि सार्वजनिक सुविधा के लिए लगाए गए सामान के गायब होने से सफाई अभियान को लेकर चुनौती और बढ़ गई है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब अजनार नदी में सफाई के बाद फिर से प्लास्टिक और अन्य कचरा जमा होने की तस्वीरें सामने आई हैं। इससे नदी को लंबे समय तक साफ रखने और कचरा फेंकने पर रोक लगाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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आठ महीने की मेहनत के बाद फिर बढ़ा कचरा

सुरेंद्र सिंह चौधरी ने करीब आठ महीने तक अजनार नदी की सफाई की थी। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने बिना विशेष उपकरण और सरकारी सहायता के बड़ी मात्रा में कचरा हटाया। नदी साफ होने के कुछ सप्ताह बाद ही वहां दोबारा प्लास्टिक और कचरा दिखाई देने लगा। इसके बाद उन्होंने हार मानने के बजाय फिर सफाई शुरू कर दी।

उनके प्रयासों को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिला है। उद्योगपति आनंद महिंद्रा और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संगठन से जुड़े लोगों तक उनका काम पहुंचा। उन्हें पर्यावरण संरक्षण से जुड़े काम के लिए विदेश से नौकरी का प्रस्ताव भी मिला था।

सिर्फ सफाई नहीं, जिम्मेदारी भी जरूरी

अजनार नदी का मामला यह सवाल खड़ा करता है कि किसी नदी को साफ करना ही पर्याप्त है या उसके बाद उसे साफ बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। एक व्यक्ति महीनों मेहनत करके कचरा हटा सकता है, लेकिन यदि लोग दोबारा नदी में कचरा डालते रहें तो समस्या बनी रहेगी।

कूड़ेदान का गायब होना भी इसी चुनौती की ओर इशारा करता है। नदी को लंबे समय तक साफ रखने के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी, नियमित सफाई, कचरा प्रबंधन और नियमों का पालन जरूरी है। पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं हो सकती।

बिट्टू तबाही की पहल ने अजनार नदी की सफाई को देशभर में चर्चा में ला दिया है। अब कूड़ेदान चोरी होने और नदी में फिर कचरा जमा होने की घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि सफाई के बाद नदी को सुरक्षित रखने के लिए स्थायी व्यवस्था कब बनेगी।

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Srota Swati Tripathy

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