
भारतीय मूल की ब्रिटिश शतरंज खिलाड़ी बोधना सिवानंदन ने महज 11 साल की उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने जुडिट पोल्गर का 38 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे कम उम्र की महिला इंटरनेशनल मास्टर बनने का गौरव हासिल किया। बोधना ने यह उपलब्धि 11 साल, 7 महीने और 16 दिन की उम्र में हासिल की। वह इंटरनेशनल मास्टर खिताब की आवश्यकताएं पूरी करने वाली सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
यूरोपियन क्लब कप में शानदार प्रदर्शन
बोधना ने मोंटेनेग्रो के बुडवा में आयोजित यूरोपियन महिला क्लब कप में यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। अंतिम दौर में उन्होंने स्वीडन की महिला इंटरनेशनल मास्टर विक्टोरिया जोहानसन को हराया। इस जीत के साथ उनका तीसरा और अंतिम इंटरनेशनल मास्टर मानक पूरा हुआ।
पूरे टूर्नामेंट में बोधना ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने सात बाजियों में 5.5 अंक हासिल किए। शुरुआती दौर में ग्रैंडमास्टर एलेक्जेंड्रा गोर्याचकिना से हार के बाद उन्होंने जबरदस्त वापसी की। इसके बाद उन्होंने लगातार मजबूत प्रदर्शन करते हुए खिताब की जरूरी शर्तें पूरी कीं।
जुडिट पोल्गर का रिकॉर्ड 38 साल बाद टूटा
जुडिट पोल्गर ने 1988 में 12 साल की उम्र में इंटरनेशनल मास्टर खिताब हासिल किया था। उनका यह रिकॉर्ड करीब चार दशक तक कायम रहा। अब बोधना ने उससे कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर नया इतिहास रच दिया है।
बोधना की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इंटरनेशनल मास्टर का खिताब महिला और पुरुष दोनों खिलाड़ियों के लिए समान है। ताजा उपलब्धि के बाद वह शतरंज इतिहास की सातवीं सबसे कम उम्र की इंटरनेशनल मास्टर बनने वाली खिलाड़ी भी हैं। इस सूची में भारत के डी गुकेश और आर प्रज्ञानानंद जैसे नाम भी शामिल हैं।
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पहले भी कई रिकॉर्ड बना चुकी हैं बोधना
यह बोधना की पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है। इससे पहले वह सबसे कम उम्र में महिला ग्रैंडमास्टर मानक हासिल करने वाली खिलाड़ी बनी थीं। वह सबसे कम उम्र की महिला इंटरनेशनल मास्टर और महिला फिडे मास्टर से जुड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम कर चुकी हैं।
2025 में उन्होंने सबसे कम उम्र में किसी ग्रैंडमास्टर को हराने वाली लड़की का रिकॉर्ड भी बनाया था। हाल ही में उन्होंने ब्रिटिश महिला शतरंज चैंपियनशिप का खिताब भी जीता। उनकी लगातार उपलब्धियों ने उन्हें दुनिया की सबसे चर्चित युवा शतरंज प्रतिभाओं में शामिल कर दिया है।
पांच साल की उम्र में शुरू किया था शतरंज
बोधना का परिवार मूल रूप से तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से जुड़ा है। उनका जन्म और पालन-पोषण लंदन के हैरो इलाके में हुआ। उनके पिता शिवनंदन वेलायुथम के मुताबिक बोधना ने करीब पांच साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया था।
अब उनकी नजर अगली बड़ी उपलब्धि पर है। एक इंटरव्यू में बोधना ने कहा था कि वह इंटरनेशनल मास्टर बनने से खुश हैं, लेकिन उनकी कोशिश जल्द ग्रैंडमास्टर बनने की है। जिस तेजी से वह रिकॉर्ड बना रही हैं, उससे शतरंज की दुनिया में उनके अगले कदम पर सभी की नजर रहेगी।
बोधना सिवानंदन ने 11 साल की उम्र में जुडिट पोल्गर का 38 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर शतरंज में नया इतिहास रचा है। भारतीय मूल की इस युवा खिलाड़ी की उपलब्धि ने न केवल ब्रिटिश शतरंज बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अब उनका अगला लक्ष्य ग्रैंडमास्टर बनना है।
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