
बुरहानपुर/ राजू सिंह राठौड़: बहुजन समाज पार्टी ने जिले में अनुसूचित जनजाति परिवारों के वन अधिकारों के मुद्दे को लेकर जिला प्रशासन के समक्ष आवाज उठाई है। पार्टी ने वन विभाग पर आदिवासी परिवारों को कथित रूप से मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत निरस्त एवं लंबित दावों की दोबारा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
वन अधिकार दावों की दोबारा जांच की मांग
बसपा जिला अध्यक्ष प्रमोद गोड़े के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि जिले के कई अनुसूचित जनजाति परिवार वर्षों से वन भूमि पर निवास और खेती कर रहे हैं, लेकिन उनके वन अधिकार दावों का न्यायपूर्ण परीक्षण नहीं किया गया। पार्टी का आरोप है कि कई मामलों में बिना समुचित जांच के दावे निरस्त कर दिए गए, जिससे पात्र आदिवासी परिवार अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित रह गए।
वन अधिकार अधिनियम का हवाला
ज्ञापन में कहा गया कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 का उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य परंपरागत वनवासियों के अधिकारों को कानूनी मान्यता देना है। ऐसे में सभी निरस्त और लंबित दावों की पुनः निष्पक्ष जांच कर पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार प्रदान किए जाएं।
बसपा की प्रमुख मांगें
बसपा ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखीं। इनमें सभी निरस्त एवं लंबित वन अधिकार दावों की निष्पक्ष पुनः जांच, पात्र अनुसूचित जनजाति परिवारों को व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार प्रदान करना, जांच पूरी होने तक प्रभावित परिवारों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाना तथा आदिवासी समुदाय के साथ कथित दुर्व्यवहार करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर आवश्यक कार्रवाई करना शामिल है।
आंदोलन की चेतावनी
बसपा ने कहा कि यदि पात्र आदिवासी परिवारों को उनके वैधानिक वन अधिकार नहीं दिए गए तो पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। पार्टी ने प्रशासन से मामले में जल्द कार्रवाई कर आदिवासी परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की।
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