
बुरहानपुर: मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में अड़गांव विवाद ने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया। बाबा साहब के बैनर फाड़े जाने की घटना से नाराज ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। हालात ऐसे बने कि प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावतको बैठक छोड़कर जनता के बीच आना पड़ा और जमीन पर बैठकर उन्हें शांत करने की कोशिश करनी पड़ी। यह घटना अब प्रशासन और कानून व्यवस्था दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
क्या है अड़गांव विवाद और क्यों बढ़ा आक्रोश?
17 अप्रैल को अड़गांव गांव में बाबा साहब के बैनर को नुकसान पहुंचाने की घटना सामने आई थी। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव पैदा कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इसी कारण लोगों का गुस्सा बढ़ता गया और मामला विरोध प्रदर्शन तक पहुंच गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक पोस्टर का मामला नहीं, बल्कि उनके सम्मान और पहचान से जुड़ा मुद्दा है। इसलिए वे सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कलेक्ट्रेट में क्या हुआ, क्यों बढ़ा हंगामा?
सोमवार को बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। कुछ ही देर में स्थिति तनावपूर्ण हो गई और कलेक्ट्रेट का घेराव कर लिया गया। उस समय मंत्री तुलसी सिलावट अधिकारियों के साथ बैठक में थे, लेकिन प्रदर्शन की सूचना मिलते ही उन्हें बाहर आना पड़ा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर जमीन पर बैठकर उन्हें समझाने की कोशिश की और जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पूरी तरह शांत नहीं हुए और अपनी मांगों पर अड़े रहे।
आगे क्या होगा? प्रशासन के सामने चुनौती
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह जल्द कार्रवाई कर लोगों का भरोसा बनाए।
अड़गांव विवाद ने बुरहानपुर में सामाजिक और राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गर्मा दिया है। मंत्री के हस्तक्षेप के बावजूद लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
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