
सार
छतरपुर/ अमित अवस्थी: छतरपुर में अंजुमन इस्लामिया कमेटी के सदर पद के लिए 4 अगस्त 2026 को हुए चुनाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने मंगलवार, 1 सितंबर को कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में अधिकारी और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर चुनाव को निरस्त करने की मांग की। शिकायतकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, प्रत्याशियों से 75 हजार रुपये की वसूली, महिलाओं को मतदान से वंचित करने, फर्जी मतदान की आशंका और प्रशासन को कथित रूप से गुमराह करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कथित चुनाव अधिकारी डॉ. रफीक शाह उर्फ रफीक अली के खिलाफ FIR दर्ज करने और नए सिरे से निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की है।
विस्तार
छतरपुर में अंजुमन इस्लामिया कमेटी के सदर पद के लिए 4 अगस्त 2026 को रजा हाल, पुलिस लाइन रोड में आयोजित चुनाव अब विवादों में घिर गया है। मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने चुनाव की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रशासन के सामने शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायतकर्ताओं ने 1 सितंबर को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने चुनाव को निरस्त करने के साथ कथित तौर पर चुनाव अधिकारी की भूमिका निभाने वाले डॉ. रफीक शाह उर्फ रफीक अली के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग की।
हालांकि, ज्ञापन में लगाए गए आरोपों पर संबंधित व्यक्ति या कमेटी की ओर से कोई पक्ष सामने आया है या नहीं, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही उनकी पुष्टि हो सकेगी।
कमेटी के अस्तित्व पर भी उठाए सवाल
ज्ञापन में दावा किया गया है कि अंजुमन इस्लामिया कमेटी कोई पंजीकृत संस्था नहीं है और पूर्व में ही कमेटी भंग हो चुकी है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद डॉ. रफीक शाह ने स्वयं को चुनाव अधिकारी घोषित कर चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति ने एसडीएम कार्यालय को कथित रूप से गलत या भ्रामक जानकारी देकर चुनाव से संबंधित आदेश हासिल किया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, आदेश क्रमांक 467/अ.वि.अ./2026 दिनांक 3 अगस्त 2026 के आधार पर पुलिस सुरक्षा प्राप्त कर 4 अगस्त को चुनाव कराया गया।
अब शिकायतकर्ता इस पूरे मामले की प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि चुनाव कराने के लिए गलत जानकारी या दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया है तो इसकी जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रत्याशियों से 75 हजार रुपये लेने का आरोप
शिकायत में चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित आर्थिक अनियमितता का भी आरोप लगाया गया है। ज्ञापन के मुताबिक चुनाव के लिए आवेदन फॉर्म एक हजार रुपये में दिए गए और तीन प्रत्याशियों से चुनाव फीस के नाम पर 25-25 हजार रुपये लिए गए।
इस तरह कुल 75 हजार रुपये की राशि वसूले जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब चुनाव प्रक्रिया बेहद कम समय में पूरी की गई तो इतनी बड़ी राशि किस आधार पर ली गई और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया।
समाज के लोगों ने प्रशासन से इस राशि की भी जांच कराने की मांग की है। यदि चुनाव फीस के नाम पर राशि वसूलने के संबंध में कोई अनियमितता सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
महिलाओं को मतदान से दूर रखने का आरोप
विवाद का सबसे प्रमुख मुद्दा महिलाओं के मताधिकार से जुड़ा हुआ है। ज्ञापन में दावा किया गया है कि छतरपुर में मुस्लिम समाज के करीब 25 हजार मतदाता हैं, जिनमें लगभग 11 हजार महिलाएं शामिल हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पूर्व में होने वाले चुनावों में महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया जाता रहा है, लेकिन 4 अगस्त को हुए चुनाव में उन्हें मतदान से कथित रूप से वंचित कर दिया गया।
समाज के लोगों ने इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। ज्ञापन में संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों का उल्लेख करते हुए प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि भविष्य में होने वाले चुनाव में सभी पात्र मतदाताओं को मतदान का समान अवसर दिया जाए।
2500 वोट पड़े, फर्जी मतदान की आशंका जताई
शिकायतकर्ताओं ने चुनाव में मतदान प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन के अनुसार चुनाव में करीब 2500 वोट पड़े। समाज के लोगों ने मतदान के दौरान इस्तेमाल की गई स्याही को लेकर भी आपत्ति जताई।
उनका आरोप है कि मतदान के दौरान उंगली पर लगाई जा रही स्याही में पानी मिला हुआ था और वह हाथ से आसानी से हट रही थी। इसी आधार पर शिकायतकर्ताओं ने फर्जी मतदान की आशंका जताई है।
हालांकि, फर्जी मतदान वास्तव में हुआ था या नहीं, यह जांच का विषय है। इसके लिए मतदान सूची, मतदाताओं की पहचान, मतदान प्रक्रिया और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच आवश्यक होगी। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से पूरे मतदान रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
शपथ पत्र को लेकर भी आपत्ति
ज्ञापन में चुनाव के दौरान आवेदकों से कथित रूप से एक शपथ पत्र लिए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, आवेदकों से यह घोषणा कराने को कहा गया कि वे किसी देश विरोधी गतिविधि में शामिल नहीं हैं।
समाज के लोगों ने इस शर्त पर आपत्ति जताते हुए कहा कि धार्मिक-सामाजिक संस्था के चुनाव में इस प्रकार का शपथ पत्र मांगना उचित नहीं है। उन्होंने इसे समाज के सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए प्रशासन से इसकी भी जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 25 समेत कई संवैधानिक प्रावधानों का उल्लेख किया है। हालांकि, इन प्रावधानों का कथित उल्लंघन कानूनी रूप से हुआ है या नहीं, इसका निर्धारण सक्षम प्राधिकारी या न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही किया जा सकता है।
BNS की धाराओं में FIR की मांग
ज्ञापन सौंपने वाले लोगों ने डॉ. रफीक शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में BNS की धारा 318, 217 और 353 का उल्लेख करते हुए FIR दर्ज करने की मांग की गई है।
इसके साथ ही शिकायतकर्ताओं ने पूरे चुनाव की प्रक्रिया की जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल शिकायत या ज्ञापन में किसी धारा का उल्लेख किए जाने से किसी व्यक्ति पर अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही यह तय होगा कि कौन-सी कानूनी धाराएं लागू होती हैं।
नए सिरे से निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग
शिकायतकर्ताओं की मुख्य मांग 4 अगस्त को हुए चुनाव को निरस्त कर नए सिरे से चुनाव कराने की है। उनका कहना है कि नए चुनाव में महिलाओं समेत सभी पात्र मतदाताओं को मतदान का अधिकार दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, मतदाता सूची को स्पष्ट करने और मतदान के दौरान ऐसी व्यवस्था करने की मांग की गई है, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका न रहे।
समाज के लोगों ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि कमेटी की वैधानिक स्थिति, चुनाव कराने की अनुमति, प्रत्याशियों से ली गई राशि और मतदान प्रक्रिया से जुड़े सभी रिकॉर्ड की जांच की जाए।
प्रशासन और पुलिस के फैसले पर नजर
अब इस शिकायत पर जिला प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में दस्तावेज, रिकॉर्ड या अन्य साक्ष्य सामने आते हैं तो संबंधित विभाग उनके आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकते हैं।
फिलहाल 4 अगस्त को हुए चुनाव को लेकर विवाद सामने आ चुका है और शिकायतकर्ताओं ने इसे निरस्त करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कथित चुनाव अधिकारी के खिलाफ FIR और नए सिरे से चुनाव कराने की मांग प्रशासन के सामने रखी है।
पूरे मामले में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चुनाव प्रक्रिया में वास्तव में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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