
छतरपुर/अमित अवस्थी की रिपोर्ट: केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत ग्राम ढौढ़न से विस्थापित परिवारों को ग्राम करौंदिया में निर्मित नवीन बसाहट में पुनर्वासित किया गया है। यहां रह रहे परिवारों की सुविधा, सुरक्षा और मूलभूत व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए जिला एवं जनपद स्तर के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से बसाहट का निरीक्षण किया।
चार स्थानों पर जलभराव, प्रशासन ने कराई पानी की निकासी
पिछले दो-तीन दिनों में हुई तेज बारिश के कारण नवीन बसाहट में चार स्थानों पर अस्थायी जलभराव की स्थिति सामने आई। इसके अलावा बसाहट के पीछे स्थित एक गड्ढे में भी बड़ी मात्रा में पानी जमा मिला। स्थिति को तत्काल संज्ञान में लेते हुए प्रशासन ने बिना देरी किए अस्थायी जलनिकासी की व्यवस्था शुरू कराई। जलभराव वाले स्थानों से पानी निकालने के लिए कच्चे चैनल तैयार कर वर्षाजल को डायवर्ट किया गया और उसे बसाहट के पीछे स्थित प्राकृतिक नाले की ओर प्रवाहित कराया गया। त्वरित कार्रवाई के बाद जलभराव की स्थिति को नियंत्रित किया गया।
सुरक्षा के लिए फेंसिंग का काम शुरू
बसाहट में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पिछले हिस्से में स्थित जलभराव वाले गड्ढे के चारों ओर सुरक्षा फेंसिंग का काम भी शुरू कराया गया है। प्रशासन का उद्देश्य जलभराव वाले स्थान के आसपास किसी संभावित दुर्घटना को रोकना है।
पेयजल को सुरक्षित बनाने कुएं में डाली क्लोरीन
विस्थापित परिवारों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बसाहट में स्थित कुएं के पानी में निर्धारित मात्रा में क्लोरीन की गोलियां डाली गईं। प्रशासन द्वारा पेयजल की स्वच्छता और परिवारों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं।
स्थायी जलनिकासी के लिए तैयार होगी कार्ययोजना
प्रशासन के अनुसार नवीन बसाहट में वर्षाजल की स्थायी एवं समुचित निकासी तथा विस्थापित परिवारों को आवश्यक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्थायी अधोसंरचना विकास की कार्ययोजना तैयार की गई है। केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। वहीं, विस्थापित ग्रामों में आवश्यक अधोसंरचना और मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए आगे भी कार्य किए जाएंगे।
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