दमोह/जबेरा: चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि पर जबेरा नगर का ऐतिहासिक प्राचीन राम मंदिर आस्था और दिव्यता का अद्वितीय संगम बना। पूरे मंदिर परिसर में “भये प्रगट कृपाला, दीनदयाला” के मंगलमय जयघोष गूंज उठे। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव को श्रद्धा, उल्लास और भक्ति की अनुपम भावनाओं के साथ मनाया गया।
सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। मंदिर के संरक्षक पंडित रमेश कुमार मिश्रा ने बताया कि यह सिद्ध पीठ वर्षों से क्षेत्र की आस्था का केंद्र रहा है, जहां भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की प्राचीन एवं मनोहारी प्रतिमाएं विराजमान हैं।
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परंपरा के अनुसार, रामनवमी के पावन अवसर पर सर्वप्रथम भगवान का विशेष जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात प्रभु को रेशमी वस्त्रों एवं आकर्षक आभूषणों से सुसज्जित किया गया। फूलों की सुगंध से महकते गर्भगृह में सजे प्रभु के दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दोपहर ठीक 12 बजे जैसे ही भगवान श्रीराम के जन्म का पावन क्षण आया, मंदिर परिसर “जय श्री राम” के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। शंखनाद और घंटियों की मधुर ध्वनि के बीच विद्वान पंडितों द्वारा विधि-विधान से विशेष पूजन-अर्चन संपन्न कराया गया। इसके उपरांत महाआरती में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया।
इस दौरान स्थानीय कीर्तन मंडली ने प्रभु श्रीराम के चरणों में भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों की मधुर लहरियों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और भक्ति के रंग में सराबोर नजर आए।
जबेरा सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। पूरा मंदिर परिसर दिनभर श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा, मानो त्रेतायुग की झलक एक बार फिर सजीव हो उठी हो।
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