
दतिया/मुंबई (आदि मिश्रा और भोपाल डेस्क की रिपोर्ट): मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव अब देश की सियासत का सबसे बड़ा और हॉट टॉपिक बन चुका है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद मचे भारी बवाल के बीच अब दो बेहद बड़ी और चौंकाने वाली घटनाएं सामने आई हैं। एक तरफ जहां कांग्रेस ने इस सीट से अपने दिग्गज नेता घनश्याम सिंह को आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने नाराज चल रहे नरोत्तम मिश्रा को दतिया से चुनाव लड़ने का खुला न्योता देकर राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
राजघराने से ताल्लुक रखने वाले तीन बार के पूर्व विधायक घनश्याम सिंह पर कांग्रेस का दांव
दतिया के पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष और 72 वर्षीय वरिष्ठ नेता घनश्याम सिंह का दतिया राजघराने से गहरा संबंध है। वह क्षेत्र के एक सम्मानित और अनुभवी चेहरे हैं, जिन पर कांग्रेस आलाकमान ने एक बार फिर बड़ा भरोसा जताया है। घनश्याम सिंह की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी काफी मजबूत रही है; दतिया और सेवढ़ा के पूर्व विधायक रहे उनके पिता महाराज कृष्ण सिंह जू देव साल 1984 में कांग्रेस के टिकट पर भिंड-दतिया संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सांसद चुने गए थे।
पहली जीत (1993): उन्होंने पहली बार साल 1993 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार शंभू दयाल तिवारी को शिकस्त देकर दतिया सीट पर कांग्रेस का परचम लहराया था।
दूसरी जीत (2003): साल 1998 में टिकट न मिलने के बाद, उन्होंने 2003 के चुनाव में जोरदार वापसी की और बीजेपी के अवधेश नायक को हराकर दोबारा विधानसभा पहुंचे।
नरोत्तम मिश्रा से मुकाबला (2008): साल 2008 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
सेवढ़ा सीट का सफर (2013 और 2018): इसके बाद उन्होंने अपनी सीट बदली और 2013 में सेवढ़ा से चुनाव लड़ा, हालांकि वहां उन्हें हार मिली। लेकिन 2018 के चुनाव में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेवढ़ा सीट पर जीत दर्ज की।
पिछला चुनाव (2023): साल 2023 के नियमित विधानसभा चुनाव में वे सेवढ़ा सीट से दोबारा मैदान में उतरे, लेकिन इस बार बीजेपी के प्रदीप अग्रवाल से हार गए।
उम्मीदवार घोषित होने के बाद आत्मविश्वास से लबरेज घनश्याम सिंह ने कहा, “मैं यह उपचुनाव हर हाल में जीतने जा रहा हूं। मेरा मुख्य फोकस क्षेत्र के विकास पर रहेगा। इसके साथ ही दतिया में पिछले कुछ समय से फैली बदले की भावना वाली राजनीति और जातिवाद के जहर को खत्म करना मेरी सबसे पहली प्राथमिकता होगी।”
शिवसेना (UBT) का बड़ा दांव: ‘मिश्रा हाँ कहें, तो उद्धव और आदित्य खुद आएंगे मध्य प्रदेश’
बीजेपी से नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उपजे असंतोष का फायदा उठाने के लिए मुंबई मुख्यालय वाली शिवसेना (UBT) ने एक बहुत बड़ा सियासी कार्ड खेला है। शिवसेना (UBT) के मध्य प्रदेश प्रमुख सुनील शर्मा ने नरोत्तम मिश्रा को अपनी पार्टी के सिंबल पर दतिया से चुनाव लड़ने का खुला ऑफर दिया है।
सुनील शर्मा ने बताया कि उन्होंने महाराष्ट्र में अपनी शीर्ष लीडरशिप से हरी झंडी मिलने के बाद ही मिश्रा को यह आमंत्रण भेजा है। उन्होंने आगे कहा, “अगर नरोत्तम मिश्रा हमारे इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो पार्टी प्रमुख व महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और युवा नेता आदित्य ठाकरे समेत तमाम बड़े राष्ट्रीय नेता खुद मध्य प्रदेश आकर दतिया की सड़कों पर उनके लिए चुनाव प्रचार करेंगे।” सुनील शर्मा ने मध्य प्रदेश आईटी सेल के प्रमुख नहार सिंह गौर को निर्देश दिए हैं कि वे मिश्रा को दिए गए इस आमंत्रण का एक वीडियो संदेश तैयार कर सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित करें।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) के पास फिलहाल 20 विधायक और तीन लोकसभा सांसद हैं। हाल ही में पार्टी को तब एक बड़ा संगठनात्मक झटका लगा था, जब उसके 6 लोकसभा सदस्य महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्ताधारी शिवसेना में शामिल हो गए थे। ऐसे में पार्टी मध्य प्रदेश के इस उपचुनाव के जरिए हिंदी बेल्ट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश में है।
टिकट घोषणा के बाद दतिया में हिंसक बवाल और आगजनी
उद्धव ठाकरे की पार्टी का यह चौंकाने वाला ऑफर बीजेपी द्वारा आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किए जाने के ठीक एक दिन बाद आया है। 30 जुलाई को होने वाले इस उपचुनाव के लिए जैसे ही आशुतोष तिवारी के नाम का ऐलान हुआ, वैसे ही नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
पूर्व गृहमंत्री के टिकट कटने से नाराज समर्थकों ने दतिया में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिए। आक्रोशित भीड़ ने नेशनल हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया, शहर के प्रमुख बाजारों को जबरन बंद कराया और स्थानीय बीजेपी कार्यालय के मुख्य गेट पर अपना ताला जड़ दिया। प्रदर्शनकारियों पर इस दौरान हिंसा और पथराव करने के भी गंभीर आरोप लगे हैं, जिसमें स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।
बीजेपी का रुख साफ: ‘प्रत्याशी में अब कोई बदलाव नहीं होगा’
दतिया में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों द्वारा किए जा रहे भारी विरोध और उपद्रव के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। मध्य प्रदेश सरकार के कद्दावर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया के सामने आकर बीजेपी उम्मीदवार के नाम में किसी भी तरह के फेरबदल या बदलाव की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ किया है कि पार्टी अपने फैसले पर अडिग है और आशुतोष तिवारी ही बीजेपी के आधिकारिक प्रत्याशी रहेंगे।
क्यों जरूरी हुआ यह उपचुनाव?
दतिया विधानसभा सीट पर यह उपचुनाव एक अदालती फैसले के बाद बेहद अनिवार्य हो गया था। दरअसल, साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े राजेंद्र भारती ने बीजेपी के नरोत्तम मिश्रा को एक कड़े मुकाबले में हरा दिया था। लेकिन इसके कुछ समय बाद ही, कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक पुराने आपराधिक मामले में अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया और उन्हें तीन साल के कारावास की सजा सुनाई गई। नियमानुसार, तीन साल की जेल की सजा मिलने के कारण राजेंद्र भारती को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया, जिससे यह सीट खाली हो गई।
चुनाव का पूरा शेड्यूल
मतदान की तारीख: 30 जुलाई 2026
मतगणना (नतीजे): 3 अगस्त 2026
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